स्वामी चिदानन्द ने श्रावण मास की दी शुभकामनायें, 14वीं गंगा आरती प्रशिक्षण का शुभारंभ
उत्तराखंड की दिव्य धरती पर कावंड़ यात्रियों का अभिनन्दन
- श्रावण मास, सृष्टि की सामूहिक साधना है, जहाँ हर बूंद शिव है और हर स्पंदन शिवत्व
- आस्था प्रशिक्षण बनती है और प्रशिक्षण जनआंदोलन का रूप लेता है वह है परमार्थ निकेतन
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन, नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत अर्थ गंगा मॉडल के तहत संचालित गंगा जागरूकता एवं गंगा आरती प्रशिक्षण कार्यशाला की 14वीं श्रृंखला का शुभारंभ परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में परमार्थ पीठाधीश्वर, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में इस दिव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए पुरोहितों एवं प्रतिभागियों ने इस विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यशाला का उद्देश्य गंगा आरती की परंपरा, उसके आध्यात्मिक महत्व, वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय दृष्टिकोण तथा गंगा संरक्षण में जनभागीदारी की भूमिका को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रशिक्षित सेवाभावी कार्यकर्ताओं का निर्माण करना है। यह पहल आस्था को जागरूकता, प्रशिक्षण को सेवा और सेवा को जनआंदोलन में परिवर्तित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
14 वीें गंगा जागरूकता एवं गंगा आरती प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन करकमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर स्वामी ने गंगा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रेरणादायी संदेश प्रदान किया।
प्रशिक्षण कार्यशाला के प्रथम दिवस का शुभारंभ प्रातःकालीन योग एवं ध्यान सत्र से हुआ। इसके पश्चात स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए। प्रतिभागियों को गंगा आरती की विधि, आरती परंपरा, अनुशासन, मंत्रों का महत्व तथा आरती के माध्यम से समाज में गंगा संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता का संदेश प्रसारित करने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
स्वामी ने देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरा पर पधारे सभी शिव भक्तों एवं कांवड़ यात्रियों का हार्दिक अभिनंदन करते हुये कहा कि श्रावण मास शिवत्व को जागृत करने का दिव्य अवसर है, जहाँ प्रकृति की प्रत्येक बूंद शिव का अभिषेक करती है। यह समय शिवाभिषेक के साथ धराभिषेक का भी है। आइए, मां गंगा, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लें। स्वच्छता, सेवा और संवेदना को अपनी साधना बनाएं। भगवान शिव हमारे भीतर की शांति, करुणा और प्रेम हैं। इस श्रावण में अपने जीवन को शिवमय बनाएं।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि “मां गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, आस्था और जीवनधारा है। मां गंगा की सेवा केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी, हमारा कर्तव्य और हमारी जीवन साधना है। जब आस्था के साथ जागरूकता जुड़ती है और सेवा के साथ संरक्षण का संकल्प जुड़ता है, तब एक सशक्त जनआंदोलन का निर्माण होता है।”
स्वामी ने कहा कि “गंगा आरती केवल दीपों का उत्सव नहीं है, यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। आरती के प्रत्येक दीप में स्वच्छता, संरक्षण और संवेदना का संदेश निहित है। हमें आरतियों के माध्यम से समाज को जोड़ना होगा, युवाओं को प्रेरित करना होगा और प्रत्येक व्यक्ति को गंगा संरक्षण का सहभागी बनाना होगा।”
उन्होंने प्रतिभागियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्राप्त ज्ञान को अपने-अपने क्षेत्रों में ले जाएँ और गंगा संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छता तथा पर्यावरण जागरूकता के वाहक बनें। उन्होंने कहा कि “हर व्यक्ति गंगा का प्रहरी बने, हर घाट स्वच्छता और संस्कार का केंद्र बने तथा हर हृदय में गंगा के प्रति श्रद्धा और जिम्मेदारी का भाव जागृत हो, यही अर्थ गंगा का वास्तविक संदेश है।”
कार्यशाला में प्रतिभागियों को गंगा के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं पर्यावरणीय महत्व के साथ-साथ गंगा आरती के आयोजन, प्रबंधन, अनुशासन और जनसंपर्क से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। परमार्थ निकेतन द्वारा आयोजित यह कार्यशाला नमामि गंगे मिशन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए गंगा संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बन रही है। आस्था के साथ जागरूकता, सेवा के साथ संरक्षण और संस्कारों के साथ पर्यावरण संरक्षण, यही है अर्थ गंगा का संदेश।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
