पटाखा फैक्ट्री में धमाके का गुनहगार कौन? 11 मजदूरों की मौत के बाद उठे गंभीर सवाल, दो दशक से चल रहा था विस्फोटक का कारोबार
फैक्ट्री मालिक समेत परिवार के छह लोगों पर मुकदमा
कौशाम्बी। जिले के पिपरी थाना क्षेत्र के मनौरी बाजार स्थित पटाखा फैक्ट्री में सोमवार को हुए भीषण विस्फोट ने पूरे जिले को दहला दिया। धमाके में 11 मजदूरों की मौत और छह लोगों के घायल होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस जानलेवा हादसे का जिम्मेदार कौन है? रिहायशी इलाके में कथित रूप से लंबे समय से चल रही इस फैक्ट्री में विस्फोटक तैयार होने की बात सामने आने के बाद पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के कई मकान जमींदोज हो गए। देर शाम तक 10 जेसीबी मशीनों से मलबा हटाने का काम चलता रहा। आशंका है कि मलबे के नीचे और लोग दबे हो सकते हैं। राहत और बचाव कार्य के दौरान प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर मौजूद रहीं।
दो दशक से चल रही थी फैक्ट्री, अब सामने आया लाइसेंस का सवाल
स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार मनौरी बाजार में यह पटाखा फैक्ट्री करीब दो दशक से संचालित हो रही थी। यहां पटाखे तैयार करने के साथ कथित रूप से विस्फोटक सामग्री भी बनाई जाती थी। बताया जाता है कि पहले इस फैक्ट्री का संचालन नौशाद करता था। उसकी मृत्यु के बाद उसके पुत्र आदिल और भाई शकील द्वारा फैक्ट्री का संचालन किए जाने की बात सामने आ रही है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि फैक्ट्री बिना वैध लाइसेंस के रिहायशी इलाके में संचालित हो रही थी। यहां तैयार होने वाला पटाखा और विस्फोटक केवल कौशाम्बी ही नहीं, बल्कि दूसरे स्थानों पर भी भेजे जाने की बात कही जा रही है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह हादसा महज दुर्घटना नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी का गंभीर मामला माना जाएगा।
2024 में भी जेल जा चुका था फैक्ट्री मालिक
सूत्रों के मुताबिक अवैध रूप से पटाखा बनाने और उसका भंडारण करने के मामले में फैक्ट्री संचालक आदिल वर्ष 2024 में जेल जा चुका है। जेल से बाहर आने के बाद भी मनौरी बाजार के रिहायशी इलाके में कथित रूप से विस्फोटक तैयार करने का काम जारी रहने की बात सामने आई है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि पहले कार्रवाई होने के बावजूद दोबारा इतनी संवेदनशील गतिविधि कैसे चलती रही? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर जानकारियां होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई? हादसे के बाद ये सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। इनका जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएगा।
स्थानीय पुलिस-प्रशासन की भूमिका भी जांच के घेरे में
रिहायशी इलाके में लंबे समय से पटाखा फैक्ट्री संचालित होने और वहां विस्फोटक तैयार किए जाने के आरोपों ने स्थानीय पुलिस और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि फैक्ट्री के पास आवश्यक लाइसेंस नहीं था और पहले भी अवैध गतिविधियों के मामले में कार्रवाई हो चुकी थी, तो फिर इसका संचालन दोबारा कैसे शुरू हुआ—यह जांच का अहम बिंदु होगा।
हादसे ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि जिले में विस्फोटक और पटाखा निर्माण इकाइयों की नियमित जांच कितनी प्रभावी तरीके से हो रही थी।
भाजपा कार्यकर्ता होने के दावे पर भी स्थिति स्पष्ट
फैक्ट्री संचालक आदिल के भाजपा कार्यकर्ता होने की चर्चा भी सामने आई है। उसकी कार के पीछे 'आदिल-भाजपा' लिखा होने की बात कही जा रही है। हालांकि भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मराज मौर्य ने स्पष्ट किया कि मनौरी में आदिल नाम का कोई व्यक्ति उनका कार्यकर्ता नहीं है। ऐसे में इस दावे की भी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
फैक्ट्री मालिक समेत परिवार के छह लोगों पर मुकदमा
विस्फोट में आठ बच्चों समेत 11 मजदूरों की मौत के मामले में पुलिस ने देर शाम फैक्ट्री संचालक के परिवार के छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। रिपोर्ट में नौशाद पुत्र निजामुद्दीन, उसकी पत्नी कहकशा बानो, पुत्र आदिल, नौशाद का भाई शकील, उसकी पत्नी शबाना और साइना पुत्री शकील को नामजद किया गया है।
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी डॉ. अमित पाल के निर्देश पर फैक्ट्री के गोदाम को बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया है। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दोषियों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी
जिलाधिकारी डॉ. अमित पाल ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच चल रही है। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि दोषी व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच का दायरा केवल फैक्ट्री संचालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाना जरूरी है कि इतनी खतरनाक फैक्ट्री किसकी अनुमति या संरक्षण में चल रही थी और संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, मृतकों के स्वजन को दो-दो लाख
भीषण हादसे का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले 11 मजदूरों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सभी घायलों के समुचित उपचार के भी निर्देश दिए हैं।
अब सबसे बड़ी चुनौती पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के साथ उन परिस्थितियों की तह तक पहुंचना है, जिनके कारण रिहायशी इलाके में कथित रूप से वर्षों से विस्फोटक तैयार करने का काम चलता रहा।
11 जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं, छह लोग घायल हैं और कई परिवार उजड़ गए हैं। ऐसे में जांच सिर्फ कागजों तक सीमित न रहकर यह तय करे कि इस बारूद के खेल के पीछे असली गुनहगार कौन था और इतनी बड़ी त्रासदी को रोकने में चूक कहां हुई।
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लेखक के बारे में
पिछले छह वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय रोहित तिवारी कौशांबी में आधारित हैं और क्षेत्रीय मुद्दों की कवरेज में लगातार कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं।
