उ0 प्र0 राज्य महिला आयोग उपाध्यक्ष ने जिला अस्पताल का किया औचक निरीक्षण
फिरोजाबाद,उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती चारू चौधरी ने मंगलवार को जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल की ओपीडी सेवाओं, प्रसूति विभाग, दवाओं की उपलब्धता तथा प्रयोगशाला सुविधाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन कर मरीजों से सीधा संवाद स्थापित किया
राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती चारु चौधरी ने निरीक्षण के दौरान अस्पताल में मौजूद महिला मरीजों एवं उनके तीमारदारों से एक-एक कर बात की, मरीजों ने अवगत कराया कि अस्पताल में सभी आवश्यक दवाएं और पैथोलॉजी जांचें परिसर के भीतर ही उपलब्ध कराई जा रही हैं। तथा किसी को भी बाहर से दवा या जांच कराने के लिए नहीं कहा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 25 से 30 सामान्य प्रसव तथा 8 से 10 सिजेरियन/ऑपरेटिव केस सफलतापूर्वक कराए जा रहे हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को दर्शाते हैं।
ओपीडी में प्रति डॉक्टर द्वारा प्रतिदिन 70 से 80 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाएं दी जा रही हैं।
अस्पताल में 2 अल्ट्रासाउंड डॉक्टर तैनात हैं। सामान्य केसों के लिए 20 दिन से 1 माह की तिथियां (वेटिंग) दी जाती हैं, इसको लेकर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की परन्तु आपातकालीन एवं ब्लीडिंग वाले गंभीर मरीजों को सीएमएस के माध्यम से तत्काल अल्ट्रासाउंड की सुविधा दी जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल में मरीजों की भीड़ काफी अधिक है, जिसे देखते हुए व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने तथा अति-आवश्यक मामलों में मरीजों को तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिये गये हैं।
इसके पश्चात उपाध्यक्ष श्रीमती चारू चौधरी ने 'सखी वन स्टॉप सेंटर' का औचक निरीक्षण कर वहाँ की व्यवस्थाओं, आवास, भोजन व सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने सेंटर में रह रही युवतियों व महिलाओं से बातचीत की और उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं पर संतोष व्यक्त किया।
वन स्टॉप सेंटर में सभी बुनियादी सुविधाएं सुचारू रूप से पाई गईं। इसमे रहने वाली बच्चियों व महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण भोजन तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने काउंसलर्स और अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सेंटर में आने वाली कम उम्र की बालिकाओं व युवतियों की काउंसलिंग प्रक्रिया को और अधिक गहन एवं प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि "अक्सर कम उम्र में बहकावे या नासमझी के कारण घर छोड़ने वाली बच्चियों को सही और गलत का अहसास नहीं हो पाता। माता-पिता के सामने आने पर भी वे सही निर्णय नहीं ले पाती हैं"। ऐसे में काउंसलर्स को चाहिए कि वे बच्चियों की बार-बार (मल्टीपल सेशन) काउंसलिंग करें, ताकि वे शिक्षा, जीवन के महत्व और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ को समझ सकें। तथा अपने परिजनों के पास सुरक्षित लौट सकें। वर्तमान में सेंटर में कुल 8 पीड़िताएं पंजीकृत हैं, जिनमें से 5 बच्चियां/महिलाएं चिकित्सीय परीक्षण (मेडिकल) व न्यायालय में बयान (164 के तहत) दर्ज कराने हेतु गई हुई हैं। केन्द्र में मौजूद 3 युवतियों से उपाध्यक्ष ने व्यक्तिगत संवाद कर उनका हाल-चाल जाना।
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लेखक के बारे में
रविंद्र वर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के फिरोज़ाबाद ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ के साथ वह समाचार कवरेज और रिपोर्टिंग का कार्य कर रहे हैं।
