कौशाम्बी में गांजे की पुड़िया का खेल, गांव-कस्बों तक पहुंच रही सप्लाई
फुटकर बिक्री की शिकायतों ने खड़े किए सवाल, आखिर कहां से आ रहा गांजा और कौन चला रहा आपूर्ति का नेटवर्क?
कौशाम्बी। जिले के गांवों और कस्बों में गांजे की छोटी-छोटी पुड़िया बिकने की शिकायतों ने मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में ग्राहक तक गांजा आसानी से पहुंच रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि फुटकर विक्रेताओं तक इतनी मात्रा में गांजा पहुंच कौन रहा है।
पुलिस समय-समय पर गांजा बरामद कर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करती है, लेकिन इसके बावजूद बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे पुलिस की निगरानी और सूचना तंत्र पर सवाल उठ रहे हैं।
फुटकर विक्रेता तक कैसे पहुंच रहा माल?
स्थानीय लोगों के मुताबिक कथित विक्रेता खुले तौर पर दुकान लगाकर बिक्री करने के बजाय ग्राहक देखकर छोटी मात्रा में गांजा उपलब्ध कराते हैं। जगह और समय बदलने के कारण ऐसे लोगों पर नजर रखना चुनौतीपूर्ण है।
लेकिन असली सवाल फुटकर विक्रेता से आगे का है। उसके पास गांजा पहुंचाने वाला कौन है? जिले में इसकी खेप किस रास्ते से आ रही है और अलग-अलग इलाकों में इसे कौन पहुंचा रहा है? इन सवालों की पड़ताल से ही पूरे नेटवर्क की तस्वीर सामने आ सकती है।
युवाओं को लेकर बढ़ी चिंता
मादक पदार्थ की आसान उपलब्धता को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। उनका कहना है कि पुलिस को बाजार और भीड़भाड़ वाले स्थानों के साथ उन इलाकों में भी निगरानी बढ़ानी चाहिए। वहीं लोगों का आरोप है कि स्थानीय सरकरी भांग के ठेकों से बिकता है गंजों की पुड़िया।
स्थानीय स्तर पर संरक्षण दिए जाने की चर्चाएं भी हैं, हालांकि बिना जांच किसी व्यक्ति या अधिकारी पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा। शिकायतों की निष्पक्ष जांच से ही इन चर्चाओं की सच्चाई सामने आ सकती है।
सिर्फ पुड़िया बेचने वाले नहीं, सप्लायर तक पहुंचे कार्रवाई
गांजे के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक के लिए फुटकर विक्रेताओं की गिरफ्तारी के साथ सप्लाई लाइन की जांच जरूरी है। पुलिस को बरामद माल के स्रोत, आपूर्ति के रास्ते और उससे जुड़े लोगों तक पहुंचना होगा।आखिर गांजा बेचने वाले हाथ तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन वह हाथ कौन है जो गांव-कस्बों तक माल पहुंचा रहा है?
यही सवाल कौशाम्बी में मादक पदार्थों के कथित कारोबार की असली तस्वीर सामने आने का इंतजार कर रहा है।
लेखक के बारे में
पिछले छह वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय रोहित तिवारी कौशांबी में आधारित हैं और क्षेत्रीय मुद्दों की कवरेज में लगातार कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं।
