बसपा का कड़ा संदेश: अनुशासन से समझौता नहीं, जयप्रकाश सिंह पुनः निष्कासित
माफी के बाद मिला दूसरा मौका भी गंवाया—पार्टी विरोधी गतिविधियों पर जिलाध्यक्ष मनोज जाटव की सख्त चेतावनी
लायक हुसैन
गाजियाबाद। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने संगठनात्मक अनुशासन को सर्वोच्च मानते हुए एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। पार्टी ने जयप्रकाश सिंह (निवासी गाजियाबाद) को दोबारा निष्कासित कर स्पष्ट कर दिया है कि बसपा में अनुशासनहीनता और अवसरवाद के लिए कोई स्थान नहीं है।
जानकारी के अनुसार, जयप्रकाश सिंह पहले दिल्ली में पार्टी से जुड़े हुए थे, लेकिन उनकी अनुशासनहीन कार्यशैली के चलते उन्हें वर्षों पहले ही संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। लंबे समय तक पार्टी से दूर रहने के बाद उन्होंने हाल ही में कुछ स्थानीय वरिष्ठ नेताओं के माध्यम से अपनी गलतियों को स्वीकार करते हुए पुनः पार्टी में कार्य करने की इच्छा जताई।
पार्टी नेतृत्व ने उदारता का परिचय देते हुए उन्हें एक और अवसर दिया और केरल राज्य में संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन यह भरोसा भी अधिक समय तक कायम नहीं रह सका। सूत्रों के मुताबिक, उनकी कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं आया और उनकी पार्टी विरोधी मानसिकता बार-बार सामने आती रही, जिससे संगठन की छवि प्रभावित हुई।
आखिरकार, पार्टी ने कड़ा निर्णय लेते हुए उन्हें पुनः निष्कासित कर दिया। इस मामले में बसपा गाजियाबाद जिलाध्यक्ष मनोज कुमार जाटव ने तीखे शब्दों में कहा कि पार्टी अनुशासन के मामले में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को चेताया कि ऐसे स्वार्थी और अवसरवादी लोगों से सतर्क रहें, जो निजी हितों के लिए संगठन के सिद्धांतों को ठेस पहुंचाते हैं। बसपा ने इस कार्रवाई के माध्यम से यह स्पष्ट संकेत दिया है कि संगठन में केवल वही लोग टिक सकते हैं, जो निष्ठा, समर्पण और अनुशासन के मूल्यों पर खरे उतरते हैं।
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
