आरक्षण के लिए मंत्री पद छोड़ने को तैयार संजय निषाद
लखनऊ। प्रदेश में विधानसभा चुनाव को देख राजनीतिक गलियारों का पारा चढ़ गया है। चुनावी जीतने के लिए तमाम पार्टियां ताकत दिखाने में लग गई हैं। अभी निषाद पार्टी ने अपने 11वें स्थापना दिवस के मौके पर रैली कर अपनी ही सहयोगी पार्टी बीजेपी को संदेश दे दिया है। संजय निषाद ने दो टूक कहा कि चाहो तो मेरा मंत्री पद ले लो, लेकिन जो मांग आरक्षण की है उसे पूरा किया जाए।
डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रेक्षागृह में कार्यक्रम में डॉ. संजय निषाद ने कहा कि उनके लिए कुर्सी या सत्ता कोई मायने नहीं रखती, उनका एकमात्र मकसद अपने समाज को हक और न्याय दिलाना है। आरक्षण लागू करने में देरी हुई, तो असर चुनाव में दिख सकता है। पुराने दिनों को याद दिलाते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ जब सांसद थे, तब वे संसद में निषाद समाज का मुद्दा उठाते थे। अब मुख्यमंत्री हैं, इस दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए । 31 दिसंबर 2016 के नोटिफिकेशन का जिक्र करते हुए कहा कि केवट, मल्लाह, बिंद और मझवार को अनुसूचित जाति का दर्जा मिलना चाहिए। 2022 के नतीजों की याद दिलाते हुए कहा कि नदियों के किनारे की 43 सीटों पर बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा था, इस मुद्दे की अनदेखी भारी पड़ सकती है। 'केवट, मल्लाह, बिंद, मझवारङ्घ अनुसूचित जाति के हकदार' के नारों से पूरा प्रेक्षागृह गूंज उठा।
संजय निषाद ने सरकारी नौकरियों का आंकड़ा रखते हुए कहा कि 28 लाख में 14 लाख आरक्षित पद हैं, लेकिन पिछड़ों में एक खास वर्ग को ही इसका सबसे ज्यादा फायदा मिला है, बाकी वंचित जातियों के साथ भेदभाव क्यों ? बोले, लड़ाई निषाद समाज के स्वाभिमान और अधिकारों की है। उनका समाज अब हक मांगने वाला नहीं बल्कि अपने वोट और ताकत के दम पर अधिकार लेने वाला समाज बन चुका है। इस अवसर पर पार्टी के हजारों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
