औद्योगिक विकास में एमएसएमई की भूमिका अहम: प्रांजल यादव
250 करोड़ रुपए का कारोबार, लखनऊ की आउटसोर्सिंग में 25 प्रतिशत वृद्धि
लखनऊ। सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को सरकारी खरीद और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से जोड़ने के उद्देश्य से गुरुवार को पीएचडी हाउस में दो दिवसीय वेंडर विकास कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में 200 से अधिक उद्यमियों, औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर पर एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन सचिव प्रांजल यादव ने कहा कि राज्य में 100 उद्योगों में 98 से अधिक एमएसएमई हैं और करीब 90 प्रतिशत इकाइयां सूक्ष्म उद्यम हैं। युवाओं को उद्यमिता की ओर आगे बढ़ना चाहिए और औद्योगिक भूखंड, वित्त, सब्सिडी एवं प्रोत्साहन जैसी एमएसएमई की प्रमुख जरूरतों पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश का निर्यात करीब दो लाख करोड़ रुपये है। इसमें नोएडा का योगदान करीब 98 हजार करोड़ और गाजियाबाद का करीब 18 हजार करोड़ रुपये है। कानपुर, मुरादाबाद, भदोही, उन्नाव, बरेली, आगरा और वाराणसी जैसे औद्योगिक केंद्र भी निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कानपुर के निदेशक वी.के. वर्मा ने कहा कि सरकारी खरीद में एमएसई की भागीदारी बढ़ाने के लिए 25 प्रतिशत खरीद का लक्ष्य निर्धारित है। विभिन्न सीपीएसई द्वारा एमएसई से खरीद किए जाने से छोटे उद्यमों के लिए बड़े कारोबारी अवसर पैदा हो रहे हैं। यूपी स्टेट नोडल एवं डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने बताया कि वर्ष 2017 में लॉन्च होने के बाद ॠीट पर करीब 20 लाख करोड़ रुपये की खरीद हो चुकी है, जिसमें एमएसई की हिस्सेदारी लगभग 45 प्रतिशत यानी करीब नौ लाख करोड़ रुपये है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भी करीब एक लाख करोड़ रुपये की खरीद की गई है। उन्होंने कहा कि करीब 25 हजार नए वेंडर पंजीकृत हुए हैं । कार्यकारी निदेशक, स्टोर्स अकमल वदूद ने कहा कि लखनऊ और आसपास का रेलवे तंत्र एमएसई के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध कराता है। रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री में करीब सात से आठ हजार करोड़ रुपये की खरीद होती है।लखनऊ के डीजीएम, आउटसोर्सिंग प्रमोद बरनवाल ने कहा कि जनपद में करीब 25 प्रतिशत वृद्धि हुई है। सेना और नौसेना से जुड़े करीब 2.5 लाख आॅर्डर संभाले जा रहे हैं, ऐसे में समय पर उत्पादन और आपूर्ति जरूरी है।
कानपुर के डीजीएम आलोक ठाकुर ने कहा कि कानपुर स्थित करीब 45 एकड़ में फैला संयंत्र का सबसे बड़ा संयंत्र है और लगभग 50-60 प्रमुख आपूर्तिकतार्ओं के साथ काम करता है। कार्यक्रम में 20 से अधिक स्टॉल लगाए गए, जिनमें एमएसएमई और प्रमुख पीएसयू ने अपने उत्पादों, सेवाओं, तकनीकों एवं उपलब्धियों का प्रदर्शन किया।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
