रामपुर रज़ा पुस्तकालय केवल भारत की ही नहीं,बल्कि विश्व की साझा सांस्कृतिक का एक महत्वपूर्ण केंद्र है:एल्चिन हुसेनअली
रामपुर रज़ा पुस्तकालय में अज़रबैजान गणराज्य के राजदूत एवं पुस्तकालय के निदेशक के मध्य विभिन्न आयामों पर आयोजित की गई महत्वपूर्ण बैठक
मुजाहिद खां
रामपुर:बृहस्पतिवार को रामपुर रज़ा पुस्तकालय में अज़रबैजान गणराज्य के राजदूत महामहिम एल्चिन हुसेनअली एवं पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र के मध्य सांस्कृतिक-शैक्षणिक आदान-प्रदान तथा भारत–अज़रबैजान संबंधों को नई दिशा देने वाले संभावित सहयोग के विभिन्न आयामों पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।इस अवसर पर राजदूत महोदय के साथ प्रो. (डॉ.) रमाकांत द्विवेदी,निदेशक,इंडिया सेंट्रल एशिया फाउंडेशन एवं प्रमुख,मेरी (MERI) सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज़ तथा सुश्री शिखा तिवारी,महामहिम की निजी सहायक,भी उपस्थित रहीं।बैठक में दोनों देशों के मध्य सांस्कृतिक संवाद,शैक्षणिक सहयोग एवं पारस्परिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया तथा भविष्य में सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने की आशा व्यक्त की गई।इससे पूर्व,सर्वप्रथम रामपुर रज़ा पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने राजदूत महामहिम एल्चिन हुसेनअली का गांधी समाधि पर पहुँचकर स्वागत किया।तत्पश्चात अज़रबैजान के राजदूत महामहिम एल्चिन हुसेनअली एवं पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने गांधी समाधि पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की तथा उनके प्रति श्रद्धासुमन अर्पित किए।
रामपुर रज़ा पुस्तकालय पहुँचकर पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने राजदूत को पुस्तकालय द्वारा प्रकाशित विज़न डॉक्यूमेंट भेंट स्वरूप प्रदान किया।इसके प्रत्युत्तर में राजदूत ने भी निदेशक को हेयदर अलीयेव फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित ख़म्सा-ए-निज़ामी गंजवी,द सेवन ब्यूटीज़,निज़ामी गंजवी एफोरिस्म तथा एक नगर (शहर) की पेंटिंग भेंट स्वरूप प्रदान की।
इस अवसर पर बैठक के दौरान निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने राजदूत को रामपुर रज़ा पुस्तकालय के गौरवशाली इतिहास,यहां संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों,संरक्षण प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली तथा डिजिटलीकरण एवं शोध से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की।उन्होंने पुस्तकालय द्वारा संचालित संरक्षण एवं पुनर्स्थापन कार्यों,अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ संभावित सहयोग तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु किए जा रहे प्रयासों से भी अवगत कराया।उन्होंने कहा कि,जैसा कि आप जानते हैं,अंतर्राष्ट्रीय कला विशेषज्ञों और इतिहासकारों ने रामपुर रज़ा पुस्तकालय को देश की सर्वश्रेष्ठ रूप से संरक्षित पुस्तकालयों में से एक की संज्ञा दी है।इस पुस्तकालय को “पुस्तकों का ताजमहल” भी कहा जाता है तथा इसे विश्व की आठवीं सबसे सुंदर पुस्तकालय के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।कहा कि राजदूत द्वारा पुस्तकालय एवं इसके संरक्षण कार्यों की जो प्रशंसा की गई,उससे हम अत्यंत अभिभूत हैं तथा हम उनका हार्दिक धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने यहां आकर हमारी पांडुलिपि संरक्षण व्यवस्था को देखा और सराहा।उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि आने वाले समय में अज़रबैजान और रामपुर रज़ा पुस्तकालय के बीच अकादमिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा।
निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने यह भी बताया कि राजदूत महोदय ने उन्हें अज़रबैजान आने का सादर निमंत्रण दिया है।उन्होंने कहा कि हम यह देखना चाहते हैं कि भारत और अज़रबैजान के बीच संबंध किस प्रकार और अधिक सुदृढ़ हो सकते हैं तथा पीपल-टू-पीपल कॉन्टैक्ट को कैसे और मजबूत किया जा सकता है।उन्होंने अंत में कहा कि आज पूरा विश्व जिस प्रकार युद्ध और अस्थिरता के संकटों से गुजर रहा है,ऐसे समय में शांति की दिशा में अग्रसर होने के लिए अकादमिक और सांस्कृतिक संस्थानों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।यही संस्थान स्थायी शांति और आपसी समझ को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
इस अवसर पर महामहिम राजदूत एल्चिन हुसेनअली ने कहा कि आज रामपुर रज़ा पुस्तकालय का भ्रमण करके उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई।उन्होंने कहा कि विश्व और भारत की समृद्ध विरासत को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला,जिसकी देखभाल पुस्तकालय एवं संग्रहालय के नेतृत्व तथा उसकी सक्षम टीम द्वारा अत्यंत पेशेवर ढंग से की जा रही है।कहा कि वे अज़रबैजान और भारत के मध्य शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ एवं ज्ञानवर्धक रूप में विकसित होते देखने के इच्छुक हैं।उन्होंने रामपुर रज़ा पुस्तकालय एवं संग्रहालय द्वारा सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए संस्थान के प्रति अपना गहन सम्मान एवं प्रशंसा व्यक्त की।
राजदूत ने रामपुर रज़ा पुस्तकालय में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों,पुस्तकों एवं ऐतिहासिक धरोहरों की सराहना की तथा इसे वैश्विक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण संस्थान बताया।
इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) रमाकांत द्विवेदी,निदेशक,इंडिया सेंट्रल एशिया फाउंडेशन एवं प्रमुख,मेरी (MERI) सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज़ ने कहा कि आज की यह बैठक भारत और अज़रबैजान के मध्य द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय सांस्कृतिक,शैक्षणिक तथा ऐतिहासिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।कहा कि दोनों देशों के बीच सदियों से विद्यमान सांस्कृतिक संपर्क,साझा मानवीय मूल्यों तथा ज्ञान परंपराओं को नई ऊर्जा प्रदान करने के लिए इस प्रकार के संवाद अत्यंत आवश्यक हैं।कहा कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय केवल भारत की ही नहीं,बल्कि विश्व की साझा सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।यहां संरक्षित फ़ारसी,उर्दू,तुर्की,संस्कृत,अरबी तथा अन्य भाषाओं की दुर्लभ पांडुलिपियां विभिन्न सभ्यताओं के बीच ऐतिहासिक संवाद और ज्ञान-विनिमय की सशक्त साक्षी हैं। ऐसे में महामहिम राजदूत का इस संस्थान का भ्रमण करना भारत और अज़रबैजान के मध्य सांस्कृतिक कूटनीति को नई दिशा प्रदान करने वाला कदम है।
बैठक के समापन के पश्चात राजदूत महोदय ने पुस्तकालय में संरक्षित दुर्लभ एवं ऐतिहासिक पांडुलिपियों का अवलोकन किया।उन्होंने विशेष रूप से ख़म्सा-ए-निज़ामी,सिकंदरनामा,हज़रत अली द्वारा हस्तलिखित पवित्र कुरान तथा रागमाला एल्बम का अवलोकन किया।इसके पश्चात उन्होंने पुस्तकालय के भव्य दरबार हॉल,पांडुलिपि अनुभाग तथा संरक्षण प्रयोगशाला का भी भ्रमण किया और वहां संचालित संरक्षण एवं पुनर्स्थापन कार्यों की विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की।
आज की इस बैठक और अज़रबैजान गणराज्य के राजदूत महामहिम एल्चिन हुसेनअली की यात्रा से सभी ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भारत और अज़रबैजान के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं सहयोग के नए आयाम स्थापित होंगे।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
