दो वर्ष से स्कूल से गायब शिक्षिका, विभाग की निगरानी पर सवाल
महुआबारी प्राथमिक विद्यालय में मनीषा शर्मा की कथित लंबी गैरहाजिरी का मामला; जानकारी मांगने पर संवाददाता को कथित तौर पर रोका, बीएसए से नहीं हो सका संपर्क
देवरिया। जनपद के रामपुर कारखाना विकासखंड के विशुनपुर कला स्थित प्राथमिक विद्यालय महुआबारी में सहायक अध्यापिका की कथित तौर पर करीब दो वर्ष से गैरहाजिरी का मामला सामने आया है। विद्यालय की शिक्षक सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद लंबे समय से विद्यालय में उनकी अनुपस्थिति को लेकर अब बेसिक शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
मामला तब सामने आया जब तरुण मित्र समाचार पत्र की टीम समाचार संकलन के लिए विद्यालय पहुंची। विद्यालय में तैनात शिक्षकों की जानकारी लेने पर सहायक अध्यापिका मनीषा शर्मा अनुपस्थित मिलीं। पूछताछ में उनके करीब दो वर्ष से विद्यालय नहीं आने की जानकारी सामने आई। हालांकि उनकी अनुपस्थिति का वास्तविक कारण क्या है, यह विभागीय अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जानकारी मांगी तो ‘ऊपर से आदेश’ का हवाला
संवाददाता ने मामले में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रमा सिंह से जानकारी लेने का प्रयास किया। आरोप है कि उन्होंने मनीषा शर्मा की अनुपस्थिति के संबंध में स्पष्ट जानकारी देने के बजाय विभागीय कार्रवाई का हवाला दिया। संवाददाता के अनुसार, विद्यालय में पत्रकारों के आने की अनुमति नहीं होने की बात भी कही गई और मनीषा शर्मा के बारे में पूछताछ करने वालों को कथित तौर पर ‘ऊपर से आदेश’ होने का हवाला दिया गया।
यदि ऐसा कोई विभागीय आदेश है तो उसकी प्रकृति और जारी करने वाले अधिकारी की जानकारी भी सार्वजनिक होना जरूरी है। सरकारी विद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति और शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़े सवालों पर पारदर्शिता अपेक्षित है।
दो साल की गैरहाजिरी पर सबसे बड़ा सवाल—निगरानी कहां थी?
विद्यालय में कुल सात शिक्षक बताए गए हैं। इनमें दो शिक्षामित्र, चार सहायक अध्यापक और एक प्रधानाध्यापिका शामिल हैं। ऐसे में मनीषा शर्मा की कथित लंबी अनुपस्थिति को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं।
क्या विद्यालय की उपस्थिति पंजिका की नियमित जांच हुई?
क्या खंड शिक्षा अधिकारी अथवा अन्य निरीक्षण अधिकारियों ने विद्यालय का निरीक्षण किया? यदि शिक्षिका स्वीकृत अवकाश पर हैं तो उसकी अवधि और आदेश क्या है? और यदि अवकाश स्वीकृत नहीं है तो अब तक क्या विभागीय कार्रवाई हुई? इन सवालों का जवाब विभागीय अभिलेखों की जांच से ही सामने आ सकता है।
पत्रकार को विद्यालय आने से रोकने का आरोप भी जांच के दायरे में
मामले में संवाददाता को विद्यालय में प्रवेश और जानकारी लेने से कथित तौर पर रोकने का आरोप भी सामने आया है। संवाददाता द्वारा संबंधित आदेश दिखाने की बात कहे जाने पर भी कथित तौर पर स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
शिक्षिका की अनुपस्थिति से बड़ा सवाल अब विभागीय पारदर्शिता का बन गया है। यदि मनीषा शर्मा की अनुपस्थिति नियमानुसार है तो विभाग को स्थिति स्पष्ट करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। वहीं यदि अनुपस्थिति नियमों के विपरीत है तो जिम्मेदारी तय करना विभाग का दायित्व है।
बीएसए का पक्ष नहीं मिल सका
मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनसे संपर्क नहीं हो सका। विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
अब जांच से तय होगी जवाबदेही
मामला केवल एक शिक्षिका की उपस्थिति तक सीमित नहीं है। यदि करीब दो वर्षों की कथित गैरहाजिरी सही पाई जाती है तो विद्यालय स्तर से लेकर निरीक्षण और विभागीय स्तर तक की निगरानी व्यवस्था की भूमिका की जांच जरूरी होगी।
विभागीय जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि मनीषा शर्मा की अनुपस्थिति का कारण क्या है, उपस्थिति पंजिका में क्या दर्ज है, अवकाश संबंधी कोई आदेश है या नहीं, वेतन भुगतान किस आधार पर हुआ और इस अवधि में संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की।
दो वर्ष की कथित गैरहाजिरी, विद्यालय प्रशासन की चुप्पी और ‘ऊपर से आदेश’ का हवाला—अब इन तीनों सवालों पर बेसिक शिक्षा विभाग से स्पष्ट जवाब अपेक्षित है।
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