प्रतापगढ़ के प्रो. डॉ. दिनेश विश्वकर्मा को मिली बड़ी उपलब्धि,
अग्नि संभावित क्षेत्रों की पहचान करने वाली तकनीक पर मिला भारतीय पेटेंट
प्रतापगढ़। जिले के चमरूपुर पठान गांव के निवासी एवं दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) के प्रोफेसर डॉ. दिनेश कुमार विश्वकर्मा ने शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। उनकी शोध टीम द्वारा विकसित मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) की सहायता से अग्नि संभावित क्षेत्रों की पहचान करने की प्रणाली एवं विधि को 29 जून 2026 को भारतीय पेटेंट संख्या 593695 प्रदान किया गया है। इस शोध कार्य में डॉ. दिनेश कुमार विश्वकर्मा के साथ डॉ. वीरेन्द्र रंगा, डॉ. सुमित कुमार शर्मा और डॉ. अभिषेक वर्मा सह-आविष्कारक हैं।
यह तकनीक ड्रोन (यूएवी) की मदद से आग लगने की आशंका वाले क्षेत्रों की समय रहते पहचान करने में सक्षम है। इससे वन क्षेत्रों, औद्योगिक परिसरों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर आग की घटनाओं की रोकथाम, आपदा प्रबंधन तथा जनसुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। डॉ. दिनेश विश्वकर्मा लंबे समय से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), कंप्यूटर विज़न, मशीन लर्निंग और ड्रोन आधारित तकनीकों पर शोध कर रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि को देश में तकनीकी नवाचार और समाजोपयोगी अनुसंधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रतापगढ़ के चमरूपुर पठान गांव से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. विश्वकर्मा का नाम स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा जारी विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में भी पिछले कई वर्षों से लगातार शामिल होता रहा है। यह उपलब्धि उनके उत्कृष्ट शोध कार्य, अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक योगदान और अकादमिक उत्कृष्टता का प्रमाण मानी जाती है। प्रो. डॉ. दिनेश कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि यह पेटेंट उनकी पूरी शोध टीम की वर्षों की मेहनत, समर्पण और दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास ऐसी तकनीकों का विकास करना है, जो समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करें।
ये खबर भी पढ़े : दूल्हा हत्याकांड : धरने पर बैठी बहन सौम्या बिंद की तबीयत बिगड़ी, जिला अस्पताल में भर्तीउन्होंने विश्वास जताया कि यह तकनीक भविष्य में आग लगने की घटनाओं की समय रहते पहचान कर जन-धन की हानि को कम करने और आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में उपयोगी सिद्ध होगी। डॉ. दिनेश विश्वकर्मा की इस सफलता से प्रतापगढ़ जिले में खुशी का माहौल है। क्षेत्रवासियों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने वाले डॉ. दिनेश विश्वकर्मा ने यह साबित किया है कि लगन, मेहनत और गुणवत्तापूर्ण शोध के बल पर विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है। डॉ. दिनेश विश्वकर्मा और उनकी पूरी शोध टीम की इस उपलब्धि को दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की अनुसंधान एवं नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता का भी प्रतीक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पेटेंट भविष्य में अग्नि सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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लेखक के बारे में
ब्रजेश त्रिपाठी को पत्रकारिता क्षेत्र में 35 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन और संपादन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में उप्र के प्रतापगढ़ जनपद के व्यूरो प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं।
