रेरा के पास शिकायतों का अंबार, लखनऊ के बड़े बिल्डर भी बकायेदार
अम्रपाली-यूनिटेक सबसे बड़े डिफाल्टर,कोर्ट एनसीएलटी में फंसे 25 हजार करोड़
- नोएडा प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा बकाया यूनिटेक ग्रुप
लखनऊ। प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार धीमी होती जा रही है। इसके कारण सरकारी प्रोजेक्ट पूरा होने में देरी हो रही है। इसका मुख्य कारण रियल एस्टेट सेक्टर के डिफाल्टर बिल्डर और रुके हुए प्रोजेक्ट हैं। यूपी रेरा और जिला प्राधिकरणों के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ नोएडा में 116 ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं पर 34,283 करोड़ रुपये का बकाया है। इसमें से करीब 25,000 करोड़ रुपये कोर्ट, एनसीएलटी और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाले मामलों में फंसे हैं।
नोएडा प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा बकाया यूनिटेक ग्रुप पर है। कंपनी के 5 भूखंडों पर 13,509 करोड़ रुपये बकाया हैं। सेक्टर 96, 97, 98 में 2006 में हुआ आवंटन सबसे बड़ा डिफाल्ट है। 2009-2011 के बीच आवंटित 9 परियोजनाओं पर 5,193 करोड़ रुपये बकाया हैं। सेक्टर 76 सिलिकॉन सिटी, सेक्टर 120 जोडियक, सेक्टर 45 सफायर जैसे प्रोजेक्ट 2019 से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हैं। एनसीएलटी प्रक्रिया में फंसे 16 डेवलपर पर कुल 7,300 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें ग्रेनाइट गेट प्रॉपर्टीज सेक्टर 110 पर 1,260 करोड़, लॉजिक्स इंफ्राटेक सेक्टर 143 पर 940 करोड़ और थ्री सी प्रोजेक्ट्स सेक्टर 168 पर 700 करोड़ शामिल हैं।
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लखनऊ में विराज कंस्ट्रक्शन, तुलसियानी कंस्ट्रक्शन, पार्थ इंफ्रा, अवध इंफ्रा लैंड जैसे नाम बकायेदारों की सूची में हैं। बीबीडी ग्रीन सिटी के लोटस कोर्ट फेज-1 में 2014 में बुक फ्लैट का कब्जा न देने पर रेरा ने विराज कंस्ट्रक्शन को अगस्त 2026 तक 49.92 लाख रुपये ब्याज सहित देने का आदेश दिया है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
