कमिश्नरेट सिस्टम में बढ़े ‘साइबर क्राइम’, नये पुलिस कमिश्नर के लिये बड़ी चुनौती!
2001 बैच के आईपीएस तरूण गाबा पहले केंद्र में बने सचिव, अब लखनऊ कमिशनरेट की जिम्मेदारी
सत्य प्रकाश/कुलदीप
- प्रदेश में पांच स्थानों पर निभाई पुलिस मुखिया की जिम्मेदारी, साइबर क्राइम में हैं पोस्ट ग्रेजुएट
- पीएसी, कारागार प्रशासन, एसएसएफ, सीबीआई जैसे महत्वपूर्ण महकमों में दी सेवाएं
लखनऊ। मंगलवार देर रात योगी सरकार ने 15 सीनियर आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है। राजधानी में पुलिस कमिश्नरेट की जिमीदारी दी गई है। वहीं आईपीएस अमरेंद्र सिंह सेंगर का एडीजी पद से डीजी पर प्रमोशन हो जाने के कारण उन्हें डीजी अभिसूचना की जिमेदारी सौंपी गई है। तरुण गाबा को क्राइम कंट्रोल के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि उन्हें केंद्र में गृह विभाग ने सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब उन्हें लखनऊ कमिशनरेट की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
तरुण गाबा अभी तक वे एडीजी सुरक्षा के पद पर कार्यरत थे। मंगलवार को हुए आईपीएस ट्रांसफर में एक बार फिर उन्हें लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी दे दी गई है। इस प्रकार 11 माह बाद एक बार फिर उनकी लखनऊ में वापसी हो गई है। तरुण गाबा को योगी सरकार के पसंदीदा पुलिस अधिकारियों में गिना जाता है। प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद 22 जून 2024 को तरुण गाबा वहां के दूसरे पुलिस कमिश्नर बने थे। लखनऊ रेंज में भी वे अपनी सेवाएं दे चुके हैं। दूसरी बार उन्हें लखनऊ रेंज के पुलिस कमिश्नर पद पर बैठाया गया है। तरुण गाबा यूपी कैडर के 2001 बैच के सीनियर आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें लखनऊ कमिश्नरेट में दूसरी बार नियुक्ति मिली है। वे मूल रूप से चंडीगढ़ के रहने वाले हैं।
प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर रहे तरुण गाबा ने पीएसी, कारागार प्रशासन, एसएसएफ, सीबीआई और अन्य महत्वपूर्ण महकमों में अपनी सेवाएं दी हैं। उन्हें रिजल्ट देने वाले अधिकारी के तौर पर जाना जाता है। सीबीआई में तैनाती के साथ केंद्र में उन्होंने काफी समय तक काम किया। यूपी कैडर में वे वापस वर्ष 2020 में लौटे।
योगी सरकार ने क्राइम कंट्रोल के लिए वर्ष 2020 में तरुण गाबा को गृह सचिव बनाया था। उन्होंने एसके भगत का स्थान लिया था। इसके अलावा वे यूपी के 5 जिलों में पुलिस प्रमुख का पद संभाल चुके हैं। महाकुंभ के सफल आयोजन में भी तरुण गाबा ने बड़ी भूमिका निभाई। प्रयागराज महाकुंभ के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए उन्होंने योजना तैयार की थी।
जानिये अपने नए पुलिस कमिशनर के बारे में...!
मूलरूप से चंडीगढ़ के रहने वाले तरुण गाबा वर्ष 2001 बैच के आईपीएस अफसर हैं। उन्होंने इलेक्टानिक्स एंड इलेक्टिकल कम्यूनिकेशन में बैचलर आफ इंजीनियरिंग, पुलिस प्रबंधन कोर्स, ज्यादातर स्टडी लीव पर रहे, 2010 में यूपी राज्यपाल एडीसी पद पर लंबे समय तक रहे हैं।
प्रयागराज के दूसरे पुलिस कमिश्नर रहे। वर्तमान में एडीजी सिक्योरिटी हैं। जबकि इससे पूर्व वह आईजी सिक्योरिटी पद पर भी तैनात रहे हैं। यह विभाग सीधे सीएम को पूरे प्रदेश की सुरक्षा रिपोर्ट देता है और इसका मुख्यालय न्यू हैदराबाद में है, जानकारों के अनुसार इनका सीधा कोई संबंधी डीजीपी या होम से नहीं होता है। तरुण गाबा ने साइबर लॉ में पीजी कोर्स कर रखा है। फील्ड पर रहते हुए स्टडी करने की निरंतरता बनाये रखी।
समिट बिल्डिंग साइबर रेड ने उड़ाये होश, हर 7वें मिनट साइबर अपराध...!
राजधानी लखनऊ और पूरे राज्य में साल 2017 से 2026 के बीच साइबर अपराध के मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2017 से दिसंबर 2025 के बीच उत्तर प्रदेश में कुल 87,850 साइबर क्राइम के मामले दर्ज (रजिस्टर्ड) किए गए हैं। लखनऊ के स्तर पर स्थिति यह है कि शहर में लगभग हर 7वें घंटे में एक साइबर अपराध का मामला सामने आ रहा है, जिसमें 74% से अधिक मामले अकेले वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े हैं।
2021 में राष्ट्रीय साइबर रिपोर्टिंग पोर्टल पर पूरे देश से शिकायतें कम थीं, वहीं यूपी और लखनऊ में पुलिस ने इसके लिए विशेष साइबर सेल का गठन शुरू किया। 2022 - 2024 इन तीन वर्षों में लखनऊ में साइबर क्राइम के ग्राफ में सबसे बड़ी छलांग देखी गई। अकेले साल 2024 में लखनऊ में दर्ज कुल मामलों में से 952 केसेस केवल साइबर धोखाधड़ी (जैसे ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, फिशिंग, और डिजिटल अरेस्ट) के थे। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर बदनामी के 144 मामले और साइबर जबरन वसूली के 184 मामले दर्ज किए गए।
वर्ष 2025 के अंत (15 दिसंबर 2025) तक, 2017 से 2025 तक संचयी रजिस्टर्ड मामलों का आंकड़ा 87,850 तक पहुंच गया। इस साल यूपी पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए साइबर ठगी का शिकार हुए लोगों के 325.25 करोड़ रुपये बैंक खातों में फ्रीज करवाए। साल 2026 में लखनऊ पुलिस ने ऑपरेशन से-वज्र के तहत अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। हाल ही में लखनऊ के समिट बिल्डिंग और विभूतिखंड इलाके में चल रहे कई फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया गया, जिनमें एक ही रेड में 119 से अधिक साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
