नगर पालिका की लापरवाही उजागर: कूड़ा उठाकर सड़कों पर डाल रहे वाहन
गौवंश का भोजन और गरीबों का "खजाना" बना कूड़ा: बाराबंकी की सफाई व्यवस्था सवालों में
मनोज शर्मा, बाराबंकी संवाददाता
बाराबंकी। जनपद में नगर पालिका की सफाई व्यवस्था एक बार फिर कटघरे में है। एक ओर जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह "स्वच्छ बाराबंकी" अभियान के तहत रोजाना निर्देश जारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका के स्तर पर जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।
सरकार ने कूड़ा निस्तारण के लिए नगर पालिका को छोटी-बड़ी गाड़ियां उपलब्ध कराई हैं। मकसद था कि घरों और बाजारों से कूड़ा उठाकर उसे तय स्थान पर पहुंचाया जाए। लेकिन हकीकत में ये गाड़ियां ही समस्या बन गई हैं। आरोप है कि सफाई कर्मचारी घरों से कूड़ा उठाकर उसे शहर की सबसे व्यस्त सड़कों के किनारे ही डाल दे रहे हैं।
परिणाम सामने है। शहर के मुख्य मार्गों पर जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। इन्हीं ढेरों में गौवंश अपने बछड़ों के साथ खाना तलाशता दिख जाता है। प्लास्टिक की पन्नियों में बंधे फलों के छिलके और घर का कचरा भी इसी कूड़े में मिल जाता है। कूड़ा बीनने वाले लोग भी रोज इसी में से अपनी रोजी-रोटी का "खजाना" निकालते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि न तो कूड़े का उठान समय पर हो रहा है और न ही उसके निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था है। डीएम के सख्त निर्देशों के बावजूद नगर पालिका के अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा। शिकायत करने पर भी फोन नहीं उठाए जाते।
अब सवाल यह है कि नगर पालिका वाकई शहर को स्वच्छ बनाने का काम कर रही है, या फिर गौवंश को भोजन और कूड़ा बीनने वालों को रोजगार देने का इंतजाम? स्वच्छ बाराबंकी" का दावा तब तक पूरा नहीं होगा जब तक कूड़ा उठान से लेकर निस्तारण तक की पूरी चेन पारदर्शी और जवाबदेह नहीं बनती।
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
