केजीएमयू में आईएसडीटी 2026 सम्मेलन
— देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साझा किया ज्ञान
— तीन दिनों तक डेंटल ट्रॉमा विषय पर महत्वपूर्ण चर्चा
लखनऊ। इंडियन सोसायटी ऑफ डेंटल ट्रॉमेटोलॉजी (आईएसडीटी) 2026 का राष्ट्रीय सम्मेलन,किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में पीडियाट्रिक एवं प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री विभाग द्वारा किया गया। ये जानकारी विभागाध्यक्ष प्रो डॉ.राजीव कुमार सिंह ने दी। उन्होने बताया यह कार्यक्रम तीन दिवसीय तक आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में देशभर से शिक्षक,डॉक्टर और छात्र शामिल हुए और तीन दिनों तक डेंटल ट्रॉमा विषय पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। सम्मेलन में तीन अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने भी अपने व्याख्यान दिए,जिससे कार्यक्रम को वैश्विक दृष्टिकोण मिला। डॉ.राजीव के मुताबिक,सम्मेलन की शुरुआत केजीएमयू में प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप के साथ हुई। इनमें स्पोर्ट्स डेंटिस्ट्री, अवल्स्ड दांतों का रीप्लांटेशन,थ्रीडी इमेजिंग,इम्प्लांट रिहैबिलिटेशन और मरीजों के व्यवहार प्रबंधन जैसे विषय शामिल थे।

मुख्य अतिथि डॉ. जी.के. सिंह, डीन, फैकल्टी ऑफ डेंटल साइंसेज़, केजीएमयू ने बताया कि इसमें छात्र और फैकल्टी पेपर प्रस्तुतियां तथा आईएसडीटी फेलोशिप परीक्षा भी आयोजित की गई। इस दौरान मुख्य वैज्ञानिक सत्र हुए, जिनमें डेंटल ट्रॉमा का सही निदान, इलाज, दांतों का पुनर्वास,चोट के मनोवैज्ञानिक प्रभाव और पल्प थेरेपी जैसे विषयों पर चर्चा की गई। तीसरे सत्र में “आस्क द एक्सपर्ट्स” सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के सवालों के जवाब दिए। इस दिन लक्सेशन इंजरी, जटिलताएं, बचाव के तरीके, अवल्शन और ऑटो ट्रांसप्लांटेशन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। डॉ.अनिल चन्द्रा ओरेशन इस दिन का मुख्य आकर्षण रहा।

प्रो डॉ.नितेश तिवारी,दिल्ली में "एएमएस" ने डेंटल ट्रॉमा को लेकर कहा यदि किसी घटना के दौरान जबड़े से सुमुचा दांत निकला जाये तो उसे फिर से जिन्दा किया जा सकता हैं। उन्होंने बताया घटना के तुरत दांत को सामान्य दूध में रख दिया जाये,दो दिन तक 70 प्रतिशत कोशिकाएं जिंदा रहती है। ताकि डाक्टर मदद से दोबारा लगवाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने बताया समारोह में आईएसडीटी अवॉर्ड्स और फेलोशिप इंडक्शन भी हुआ। इस अवसर पर वैज्ञानिक अध्यक्ष डॉ. नीरजा सिंह, डॉ.अफरोज आलम अंसारी (को-ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी/ट्रेज़रर) तथा डॉ.गरिमा जिंदल (जॉइंट-ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी) सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
