बिजली कर्मियों का उत्पीड़न समाप्त किया जाए:शैलेन्द्र दुबे संयोजक
—अनुभवी संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लिया जाए:संघर्ष समिति
लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति सोमवार को प्रस्तावित विद्युत व्यवस्था की समीक्षा बैठक से पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि भीषण गर्मी के दौरान बिजली व्यवस्था को सुचारू एवं निर्बाध बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर हटाए गए अनुभवी संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लिया जाए तथा बिजली कर्मियों एवं अभियंताओं पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को तत्काल समाप्त किया जाए।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया के नाम पर विगत डेढ़ वर्ष में 25,000 से अधिक अनुभवी संविदा कर्मियों को सेवा से हटा दिया गया है। इन कर्मियों के पास विद्युत वितरण प्रणाली के संचालन एवं रखरखाव का वर्षों का अनुभव था। इतनी बड़ी संख्या में अनुभवी कर्मियों के हटने से प्रदेश की विद्युत व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने बताया कि गर्मियों के दौरान बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाती है,जिसके कारण सब-स्टेशनों, ट्रांसफार्मरों एवं विद्युत लाइनों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। परिणामस्वरूप फॉल्ट की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिन्हें समयबद्ध ढंग से दूर करने के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित एवं अनुभवी कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में संविदा कर्मियों की भारी कमी से उपभोक्ताओं को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के नाम पर लगभग 45 प्रतिशत संविदा कर्मियों को हटाया जा चुका है। इसके अतिरिक्त वर्तमान में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की प्रक्रिया के अंतर्गत भी बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी की गई है, जिससे फॉल्ट अटेंड करने, लाइनों के रखरखाव तथा उपभोक्ताओं की शिकायतों के निस्तारण में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
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