गोस्वामी जी ना होते तो आज घर-घर राम की शायद चर्चा ना होती:ओमप्रकाश पांडे
प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ रामानुज आश्रम में परम वैष्णव संत गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के पावन अवसर पर धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि गोस्वामी जी ना होते तो आज घर-घर राम की चर्चा ना होती। प्रभु श्री राम सनातन धर्मियों के आराध्य हैं ।गोस्वामी जी अपने को स्वामी नहीं बल्कि अपने को भगवान का दास मानते थे। अवधी भाषा में दो महान साहित्य लिखे गए प्रथम संत गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा प्रभु श्री राम के जीवन चरित्र पर श्रीमद्वाल्मीकि रामायण को आधार मानकर और तमाम वेद पुराण आदि को साक्षी मानते हुए आपने श्री रामचरितमानस की रचना किया दूसरा मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा पद्मावत अवधी भाषा का प्रमुख महाकाव्य है।
गोस्वामी तुलसीदास जी सनातन धर्म के प्राण थे। आपके जन्म के विषय में विभिन्नताएं हैं कोई चित्रकूट जिले में मानता है कोई गोंडा जिले में और कोई जनपद प्रतापगढ़ के राजापुर ग्राम में मानता है। संवत 1607 में मौनी अमावस्या दिन बुधवार के दिन चित्रकूट में आपने प्रभु श्री राम जी का दर्शन किया। जहां पर हनुमान जी ने तोता का रूप धारण करके आपको अवगत कराया कि " चित्रकूट के घाट पर भाई संतान की भीर। तुलसीदास चंदन घिसें तिलक देत रघुवीर ।। श्री हनुमान जी की आज्ञा से आप अयोध्या चल पड़े। संवत 1628 में प्रयाग में माघ मेला था वहां कुछ दिन ठहरने के बाद एक दिन बट वृक्ष के नीचे आपने भारद्वाज और याज्ञवल्क्य मुनि का दर्शन किया। वहां से आप काशी गए भगवान विश्वनाथ के आदेश से आप अयोध्या आए। संवत 1631 का प्रारंभ हुआ रामनवमी का दिन था। त्रेता में जो समय राम जन्म के दिन था। उसी दिन प्रातः काल तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना प्रारंभ की दो वर्ष 7 महीना 26 दिन में ग्रंथ की समाप्ति हुई। संवत 1633 के मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष में राम विवाह के दिन सातों कांड पूर्ण हो गए ।
संवत 1680 श्रावण कृष्ण तृतीया शनिवार को अस्सी घाट पर गोस्वामी जी ने राम-राम कहते हुए अपने शरीर का परित्याग किया। आपकी अनेक रचनाएं हैं, श्री रामचरितमानस, विनय पत्रिका, कवितावली, दोहावली, वरवै रामायण, पार्वती मंगल, रामलला नहछू, हनुमान चालीसा जैसी अमूल्य रचनाओं के द्वारा आपने समाज को और सनातन धर्म को उपदेशित किया। यदि गोस्वामी जी ने हनुमान चालीसा ना लिखी होती तो आज घर-घर प्रेतों का डेरा रहता। रामचरितमानस को लिखते समय आपने स्वयं कहा कि मैं यह "स्वान्तः सुखाय" लिख रहा हूं यदि किसी को कोई आपत्ति लगती हो तो मैं उसे उस पर थोप नहीं रहा हूं। गोस्वामी जी की रचित श्री रामचरितमानस की एक-एक चौपाई पर शोध हो रहा है। पूरे विश्व में श्री रामचरितमानस पढ़ी जा रही है।
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों में इतना प्रभाव है यदि बालक शिक्षा न ग्रहण कर रहा हो, किसी पुत्री का विवाह न हो रहा हो, किसी को युद्ध में जाना हो, किसी को ज्ञान प्रदान करना हो, किसी को घर से किसी कार्य के लिए निकलना हो तो वह उनकी चौपाइयों के माध्यम से इन सब बातों को प्राप्त कर सकता है। जो लोग गोस्वामी जी के श्री रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर टीका टिप्पणी करते हैं वह अधर्मी हैं। उन्हें उनकी चौपाइयों के अर्थ का ज्ञान ही नहीं है।
आप एक महामानव त्यागी तथा लोभ लालच से दूर रहने वाले व्यक्तित्व के महापुरुष थे।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
ब्रजेश त्रिपाठी को पत्रकारिता क्षेत्र में 35 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन और संपादन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में उप्र के प्रतापगढ़ जनपद के व्यूरो प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं।
