UP चुनाव 2027: दलित वोट बैंक पर SP का बड़ा दांव, 100 SC-ST उम्मीदवार उतारने की तैयारी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी (SP) ने दलित वोट बैंक को साधने की रणनीति तेज कर दी है। पार्टी की योजना अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के 100 उम्मीदवारों को टिकट देने की है। इनमें 84 आरक्षित सीटों, 2 ST सीटों के अलावा 14 सामान्य सीटों पर भी दलित उम्मीदवार उतारने की तैयारी की जा रही है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह रणनीति अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) सामाजिक समीकरण को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। इसके जरिए समाजवादी पार्टी अपनी पारंपरिक यादव-मुस्लिम छवि से बाहर निकलकर व्यापक सामाजिक आधार बनाने की कोशिश कर रही है।
बसपा के कमजोर पड़ने का फायदा उठाना चाहती है SP
समाजवादी पार्टी का मानना है कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) का जनाधार लगातार कमजोर हो रहा है। ऐसे में दलित मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में है। पार्टी इसी मौके को भुनाना चाहती है। सूत्रों के अनुसार, सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवारों को उन क्षेत्रों से उतारा जाएगा, जहां पार्टी पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में नहीं है। इससे दलित समाज के बीच यह संदेश जाएगा कि SP उन्हें सिर्फ आरक्षित सीटों तक सीमित नहीं रखना चाहती।
2024 लोकसभा चुनाव से मिला था संकेत
2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने फैजाबाद (अयोध्या) और मेरठ जैसी सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारे थे। फैजाबाद से अवधेश प्रसाद ने जीत दर्ज की थी, जबकि मेरठ में सुनीता वर्मा बेहद कम अंतर से चुनाव हार गई थीं। पार्टी इसे अपनी रणनीति की सफलता के संकेत के रूप में देख रही है।
दलित वोटों के लिए बढ़ी राजनीतिक लड़ाई
उत्तर प्रदेश में दलित आबादी करीब 21 प्रतिशत है। पिछले कुछ वर्षों में बसपा के कमजोर होने के बाद समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा तीनों इस वोट बैंक को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही हैं। हाल ही में भाजपा ने भी अपने संगठन और सरकार में सामाजिक संतुलन बनाने पर जोर दिया है। वहीं कांग्रेस भी संविधान बचाओ अभियान और दलित नेताओं के जरिए इस वर्ग तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
अखिलेश ने BSP पर भी साधा निशाना
हाल के दिनों में अखिलेश यादव ने बहुजन समाज पार्टी पर भी खुलकर हमला बोला है। उन्होंने एक जनसभा में कहा था कि "BSP को वोट देना मतलब अपना वोट बर्बाद करना है।" राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान साफ संकेत देता है कि समाजवादी पार्टी अब दलित वोट बैंक के लिए बसपा को सीधे चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन दलित वोटों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला अभी से तेज होता दिखाई दे रहा है।
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गर्गी विश्वकर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़ी हैं और डिजिटल डिप्टी चीफ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। वह डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्पष्ट, तथ्यपरक और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करती हैं।
