डीएम साहब,क्या अब जिलेभर के निजी अस्पतालों की होगी पड़ताल?
निजी अस्पतालों पर कार्रवाई के बीच स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
वैभव हॉस्पिटल समेत कई संस्थानों के मानकों की जांच की मांग
देवरिया। जिले में निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई के बीच स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि जिले में कई निजी अस्पताल, पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटर मानकों और आवश्यक अनुमति के बिना संचालित हो रहे हैं। यदि स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियमित जांच और निगरानी की जा रही थी तो ऐसी कमियां लंबे समय तक कैसे बनी रहीं, यह बड़ा सवाल है।
हाल ही में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने दो डायग्नोस्टिक सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई की। जायसवाल डायग्नोस्टिक सेंटर की अल्ट्रासाउंड मशीन को पंजीकरण के बिना संचालन के आरोप में जब्त किया गया, जबकि कशिश डायग्नोस्टिक सेंटर को प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त होने और नियमानुसार नवीनीकरण नहीं होने के कारण सील किया गया। इस कार्रवाई के बाद जिले में संचालित अन्य निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
ये खबर भी पढ़े : सूचनाओं के नाम पर जनपद के 34 माध्यमिक विद्यालयों का वेतन रोकना अन्यायपूर्ण - संजय द्विवेदीदेवरिया-सलेमपुर मार्ग स्थित वैभव हॉस्पिटल को लेकर भी पंजीकरण, विभागीय एनओसी और निर्धारित मानकों के अनुपालन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में अस्पताल के पंजीकरण, एनओसी, भवन, चिकित्सकीय स्टाफ और अन्य अनिवार्य मानकों की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए जा रहे कथित संरक्षण और अनियमितता के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है। पूर्व में तत्कालीन जिलाधिकारी जेपी सिंह के कार्यकाल में निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों के खिलाफ अभियान चलाए जाने की चर्चा रही है। अब सवाल यह है कि मौजूदा व्यवस्था में नियमित निरीक्षण और कार्रवाई की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जिलाधिकारी की ओर से लगातार समीक्षा और कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के स्तर से होने वाली निगरानी, पंजीकरण और निरीक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा हो तो तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। इससे यह भी सामने आएगा कि किन संस्थानों का निरीक्षण हुआ, किनके दस्तावेज सही पाए गए और किनके खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। अब बड़ा सवाल यही है कि निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों पर कार्रवाई के बाद क्या स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था की भी जवाबदेही तय होगी।
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