कर्मियों की कमी के बावजूद बिजली आपूर्ति का रिकॉर्ड टूटा: समिति
प्रबंधन का दायित्व कि उत्पीड़न की सभी कार्रवाई वापस ले
- हटाए गए संविदा कर्मियों को करे बहाल
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि भीषण गर्मी, लगातार बढ़ती बिजली की मांग और बिजली कर्मियों की अत्यंत कम संख्या के बावजूद उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों ने जिस समर्पण, मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा के साथ प्रदेश की जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की है, वह अपने आप में एक नया इतिहास है।
संघर्ष समिति ने कहा कि 24 जून 2026 को उत्तर प्रदेश ने 32,673 मेगावाट की अब तक की सर्वाधिक बिजली मांग की सफलतापूर्वक आपूर्ति कर देश में नया कीर्तिमान स्थापित किया। पिछले वर्ष प्रदेश की अधिकतम बिजली मांग 31,486 मेगावाट थी। इस प्रकार बिजली कर्मियों ने न केवल पिछले रिकॉर्ड को तोड़ा, बल्कि देश के किसी भी राज्य द्वारा पूरी की गई सर्वाधिक पीक डिमांड का नया रिकॉर्ड भी बनाया।
संघर्ष समिति के अनुसार मई से 29 जुलाई 2026 के बीच 90 दिनों में उत्तर प्रदेश 49 दिन देश में सर्वाधिक बिजली आपूर्ति करने वाला राज्य रहा तथा 32 दिन दूसरे स्थान पर रहा। इतना ही नहीं, पांच अलग-अलग दिनों में उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र की अब तक की सर्वाधिक 32,317 मेगावाट की पीक डिमांड से भी अधिक बिजली आपूर्ति की। संघर्ष समिति ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के बिजली कर्मियों की मेहनत और बिजली व्यवस्था को संभालने की उनकी अदम्य क्षमता का प्रमाण है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई है जब बिजली कर्मियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। उपकेंद्रों पर कर्मचारियों की कमी है, तकनीकी एवं परिचालन कार्यों का भारी दबाव है और उपलब्ध कर्मचारियों को बिजली आपूर्ति बनाए रखने के साथ-साथ उपभोक्ताओं की शिकायतों, फॉल्ट, ब्रेकडाउन, मरम्मत एवं रखरखाव जैसे अनेक कार्य भी करने पड़ रहे हैं। इसके बावजूद बिजली कर्मियों ने दिन-रात मेहनत कर प्रदेश की बिजली व्यवस्था को संभाला और रिकॉर्ड बिजली मांग पूरी की।
संघर्ष समिति ने कहा कि जब बिजली कर्मियों की मेहनत से प्रदेश देश में रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति का कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, तब प्रबंधन को बिजली कर्मियों को पुरस्कृत और प्रोत्साहित करना चाहिए, न कि उनका उत्पीड़न करना चाहिए। बिजली कर्मियों पर की जा रही दंडात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्रवाई तत्काल समाप्त की जानी चाहिए तथा मार्च 2023 के आंदोलन के बाद हटाए गए संविदा कर्मियों को पूर्व में हुए समझौतों एवं दिए गए निर्देशों के अनुरूप तत्काल सेवा में वापस लिया जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में संविदा एवं आउटसोर्स कर्मियों को हटाए जाने से बिजली व्यवस्था पर काम का बोझ नियमित एवं उपलब्ध कर्मचारियों पर और बढ़ गया है। एक ओर बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ रही है और प्रदेश रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बिजली कर्मियों के पदों और मानव संसाधन में कटौती करना पूरी व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट कहा कि बिजली कर्मियों की इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय उन हजारों बिजली कर्मियों को जाता है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालकर भी प्रदेश की बिजली व्यवस्था को मजबूती से संभाला। ऐसे कर्मियों को सम्मानित करने के बजाय यदि उनके विरुद्ध उत्पीड़नात्मक कार्रवाई जारी रखी गई अथवा निजीकरण के नाम पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों को हटाया गया तो यह बिजली कर्मियों के साथ अन्याय ही नहीं बल्कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ होगा।
संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि— बिजली कर्मियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाइयां तत्काल वापस ली जाएं। मार्च 2023 के आंदोलन के बाद हटाए गए संविदा कर्मियों को तत्काल सेवा में बहाल किया जाए।
बिजली व्यवस्था की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप नियमित पदों का सृजन कर पर्याप्त संख्या में तकनीकी एवं अन्य बिजली कर्मियों की भर्ती की जाए। निजीकरण अथवा पुनर्गठन के नाम पर बिजली कर्मियों की छंटनी और पदों में कटौती तत्काल रोकी जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया है कि पर्याप्त मानव संसाधन, बेहतर कार्य परिस्थितियां और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो प्रदेश की बिजली व्यवस्था और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इसलिए अब प्रबंधन को बिजली कर्मियों की उपलब्धियों से सबक लेते हुए उनके साथ टकराव और उत्पीड़न का रास्ता छोड़कर संवाद, सम्मान और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति करने वाले बिजली कर्मियों का उत्पीड़न नहीं, सम्मान होना चाहिए और निजीकरण के नाम पर बिजली कर्मियों को हटाने के बजाय प्रदेश की बढ़ती बिजली जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
