‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 42.09 लाख की साइबर ठगी
लखनऊ पुलिस ने 13.83 लाख रुपये कराए फ्रीज
छह बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई थी ठगी की रकम, असम-गुजरात-कर्नाटक से जुड़े मोबाइल नंबरों की जांच, IP लोकेशन कंबोडिया, यूएई और चीन तक मिली
लखनऊ। डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 42 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी के मामले में लखनऊ पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने ठगी की रकम में से 13 लाख 83 हजार 735 रुपये फ्रीज/होल्ड करा दिए हैं। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगों ने पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट किए जाने का डर दिखाकर कुल 42,09,869 रुपये की रकम अपने बताए बैंक खातों में ट्रांसफर कराई थी।
कमिश्नरेट लखनऊ में साइबर अपराध की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस आयुक्त तरुण गाबा, संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय अपर्णा कुमार के निर्देशन और पुलिस उपायुक्त अपराध अनिल कुमार यादव तथा अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव की निगरानी में यह कार्रवाई की गई।
छह बैंक खातों में ट्रांसफर हुई थी रकम
साइबर क्राइम थाने में जमील अब्बास जमाली की शिकायत पर मु0अ0सं0 89/2026 दर्ज किया गया है। मामले में बीएनएस की धारा 318(4), 319(2), 351(4) और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
विवेचना के दौरान सामने आया कि साइबर ठगों ने पीड़ित से हासिल रकम को कुल छह बैंक खातों में ट्रांसफर कराया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने संबंधित बैंकों से संपर्क कर खातों में मौजूद धनराशि को फ्रीज/होल्ड कराने की कार्रवाई शुरू की।
अब तक दो बैंक खातों से संबंधित जानकारी पुलिस को मिल चुकी है। इन खातों पर की गई कार्रवाई के बाद कुल 13,83,735 रुपये की रकम सुरक्षित कराई जा चुकी है।
छह मोबाइल नंबरों की भी जांच
जांच के दौरान पुलिस को घटना में इस्तेमाल अथवा उससे जुड़े छह मोबाइल नंबरों की जानकारी मिली है। तकनीकी जांच में ये नंबर अलग-अलग राज्यों से जुड़े पाए गए हैं। इनमें असम, गुजरात और कर्नाटक शामिल हैं।
पुलिस इन मोबाइल नंबरों से जुड़े लोगों और उनके बीच हुई बातचीत की भी जांच कर रही है। बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को आपस में जोड़कर साइबर ठगी के नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
विदेशी IP लोकेशन से भी जुड़े तार
पुलिस के अनुसार, व्हाट्सऐप से प्राप्त तकनीकी विवरण और IP संबंधी जानकारी के विश्लेषण में कुछ IP लोकेशन कंबोडिया, यूएई और चीन से संबंधित पाई गई हैं। इससे पुलिस को साइबर ठगी के नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच करनी पड़ रही है।
जांच एजेंसी बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, IP एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की कड़ियां जोड़कर घटना में शामिल संदिग्धों की पहचान और उनकी भूमिका से संबंधित साक्ष्य जुटा रही है।
पुलिस का कहना है कि शेष बैंक खातों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जानकारी प्राप्त की जा रही है। इसके आधार पर आगे की विवेचनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने लोगों को किया सतर्क
अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव ने आम लोगों से अपील की है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। किसी भी पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी की ओर से वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहा जाता।
उन्होंने लोगों से कहा कि इस तरह के कॉल आने पर घबराएं नहीं और अपनी बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति वीडियो कॉल या ऑनलाइन माध्यम से गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे मांगता है तो तत्काल सतर्क हो जाएं।
संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉल या साइबर ठगी की स्थिति में 1930 पर शिकायत करने तथा cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
