बीजेपी के सर्वे ने उड़ाई माननीयों की नींद, जिताऊ कैंडिडेट की तलाश शुरू!
गुप्त सर्वे में मिला फीडबैक 40 फीसद विधायकों के टिकट कटने के आसार
राजेश सिंह
- विधायकों के रिपोर्ट कार्ड से तय होगा, किसे दोबारा मैदान में उतारा जाये, किसका पत्त कटे
लखनऊ। अगले कुछ माह में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा दिनों दिन चढ़ रहा है। सत्तारूढ़ बीजेपी ने हैट्रिक लगाने के खातिर मास्टर प्लान बनाया है, जो कई मौजूदा विधायकों की नींद उड़ा सकती है। पार्टी को ऐसा कैंडिडेट चाहिए जो जीतकर विधानसभा पहुंचने की कुवत रखता हो। इसीलिये यूपी के सभी भाजपा विधायकों के कामकाज, जनता के बीच उनकी छवि, लोकप्रियता का गुप्त सर्वे करा चुकी है जिसमें 40 प्रतिशत ऐसे विधायक है जो जितने की क्षमता नहीं रखते। इससे माननीयों की नींदे ऊड़ गयी है। हालाकि अभी पार्टी द्वारा कई सर्वे और होंगे।
ऐसे में बीजेपी से जुड़े कुछ राजनीतिक जानकारों का मत है कि ऐसे कई दौर के सर्वे के बाद मिले फीडबैक के तहत ही विधायकों का रिपोर्ट कार्ड ही तय करेगा कि किसे दोबारा मैदान में उतारा जाएगा और किसका पत्ता कटेगा। पार्टी किसी एक एजेंसी या नेता की रिपोर्ट पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करने वाली है। यह रिपोर्ट गोपनीय रखी गई है। इसे तीन अलग-अलग स्तरों पर अंजाम दिया गया।
सर्वेयर सीधे आम जनता से रूबरू हुए। वे सार्वजनिक जगहों पर जाकर सरकार और विधायक के काम करने के तरीके का आकलन किया। भाजपा कार्यकतार्ओं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थानीय कैडर, वकीलों, डॉक्टरों, शिक्षकों, युवाओं, महिलाओं, दुकानदारों और तमाम सामाजिक संगठनों से भी विधायक के बारे में फीडबैक लिया। बीजेपी ने 2022 के चुनाव में भी ऐसा ही फॉमूर्ला अपनाया था। एजेंसी आधारित सर्वे के आधार पर 165 सीटों पर नए चेहरों को मौका मिला था और 120 से ज्यादा विधायकों के टिकट काट दिए गए थे। इस बार जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आएगी, टिकट खतरे में पड़ना तय है।
मुस्लिम बहुल इलाकों में सरकारी योजनाओं जैसे मुफ्त राशन के लाभार्थियों से राय ली जा रही है। उन 61 विधानसभा सीटों पर अलग से विस्तृत सर्वे और डेटा कलेक्शन शुरू कर दिया है, जहां पिछले तीन चुनावों 2012, 2017 और 2022 से हार का मुंह देखना पड़ रहा है। पूर्वी यूपी की 22 सीटों आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, मिजार्पुर जैसे जिलों की कमजोर सीटों पर विशेष नजर है। इसके लिए पार्टी अलग से रणनीति बना रही है। 2022 के चुनाव में हारी हुई सीटों में 27 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी। इस समय राष्ट्रीय लोकदल, निषाद पार्टी, अपना दल एस और सुभासपा एनडीए का हिस्सा हैं।
बीजेपी इन चुनौतीपूर्ण सीटों पर नए सहयोगियों के साथ मिलकर बूथ-स्तरीय रणनीति बना रही है। पहले सर्वे में मौजूदा भाजपा विधायकों में से 40 प्रतिशत की छवि ठीक नहीं पायी गयी। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अशोक पाण्डेय ने बताया कि इस सर्वे का कोई खास मतलब नहीं है, न ही मुझे इसके बारे में जानकारी है। अभी कई तरह के सर्वे एवं जांच होंगी। साथ ही पार्टी नेताओं के फीडबैक , जातीय समीकरण, विपक्ष की रणनीति के आधार पर टिकट तिवरण किया जाता है। फिलहाल संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
