रामपुर रज़ा पुस्तकालय पहुंचे ताजिकिस्तान गणराज्य के राजदूत
ताजिकिस्तान गणराज्य के राजदूत एवं पुस्तकालय के निदेशक के मध्य सांस्कृतिक-शैक्षणिक आदान-प्रदान तथा भारत–ताजिकिस्तान संबंधों को नई दिशा देने वाले संभावित सहयोग के विभिन्न आयामों हुई पर महत्वपूर्ण बैठक
मुजाहिद खां
रामपुर:बुधवार को रामपुर रज़ा पुस्तकालय में ताजिकिस्तान गणराज्य के राजदूत लुकमोन बोबोकालोंज़ोदा एवं पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र के मध्य सांस्कृतिक-शैक्षणिक आदान-प्रदान तथा भारत–ताजिकिस्तान संबंधों को नई दिशा देने वाले संभावित सहयोग के विभिन्न आयामों पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
इस अवसर पर रामपुर रज़ा पुस्तकालय की अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संबंध सलाहकार समिति के सदस्य प्रो. रमाकांत द्विवेदी,निदेशक,इंडिया सेंट्रल एशिया फाउंडेशन भी उपस्थित रहे।बैठक में दोनों देशों के मध्य सांस्कृतिक संवाद,शैक्षणिक सहयोग एवं पारस्परिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया तथा भविष्य में सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने की आशा व्यक्त की गई।
इससे पूर्व रामपुर रज़ा पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने ताजिकिस्तान गणराज्य के राजदूत महामहिम लुकमोन बोबोकालोंज़ोदा का गांधी समाधि पर पहुँचकर स्वागत किया।तत्पश्चात राजदूत लुकमोन बोबोकालोंज़ोदा एवं पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने गांधी समाधि पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की तथा उनके प्रति श्रद्धासुमन अर्पित किए।
रामपुर रज़ा पुस्तकालय पहुँचकर पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने राजदूत को पुस्तक भेंट स्वरूप प्रदान कर स्वागत किया।इसके प्रत्युत्तर में राजदूत ने भी निदेशक को पेंटिंग भेंट स्वरूप प्रदान की।
इस अवसर पर आयोजित बैठक के दौरान रामपुर रज़ा पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने राजदूत लुकमोन बोबोकालोंज़ोदा को पुस्तकालय के गौरवशाली इतिहास,यहाँ संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों,संरक्षण प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली तथा डिजिटलीकरण एवं शोध से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की।उन्होंने पुस्तकालय द्वारा संचालित संरक्षण एवं पुनर्स्थापन कार्यों,सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु किए जा रहे प्रयासों तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ संभावित सहयोग की संभावनाओं से भी अवगत कराया।कहा कि अंतरराष्ट्रीय कला विशेषज्ञों एवं इतिहासकारों ने रामपुर रज़ा पुस्तकालय को देश के सर्वश्रेष्ठ संरक्षित पुस्तकालयों में से एक माना है।अपनी अद्वितीय स्थापत्य गरिमा एवं दुर्लभ संग्रह के कारण इसे “पुस्तकों का ताजमहल” भी कहा जाता है तथा विश्व की सुंदरतम पुस्तकालयों में इसकी विशेष पहचान है।उन्होंने बताया कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय एवं संग्रहालय विश्वविख्यात संस्थान है,जहाँ संरक्षित अनेक अमूल्य पांडुलिपियों का सीधा संबंध मध्य एशिया एवं पश्चिम एशिया की संस्कृति,इतिहास और साहित्य से है।पुस्तकालय के समृद्ध संग्रह के अध्ययन हेतु यूरोप,अमेरिका,जापान सहित विश्व के विभिन्न देशों से शोधार्थी एवं विद्वान नियमित रूप से यहाँ आते हैं।विशेष रूप से मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के देशों की इस संग्रह के प्रति गहरी रुचि रही है।इसी क्रम में विभिन्न देशों के राजदूत समय-समय पर पुस्तकालय का भ्रमण करते रहे हैं तथा पुस्तकालय भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित करता है।राजदूत लुकमोन बोबोकालोंज़ोदा के पुस्तकालय आगमन पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके इस भ्रमण से भारत और ताजिकिस्तान के मध्य सांस्कृतिक एवं अकादमिक संबंधों को नई दिशा मिलेगी।बैठक में दोनों देशों के संस्थानों के मध्य सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ बनाने तथा भविष्य में समझौता ज्ञापन संपादित करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।उन्होंने आगे बताया कि पुस्तकालय के संग्रह में कुछ ऐसी महत्वपूर्ण पांडुलिपियाँ एवं ग्रंथ सुरक्षित हैं जिनका प्रत्यक्ष संबंध ताजिकिस्तान की ऐतिहासिक,भाषाई एवं सांस्कृतिक परंपराओं से है।इस संदर्भ में राजदूत ने आश्वासन दिया है कि ताजिकिस्तान से विद्वानों एवं शोधार्थियों को रामपुर रज़ा पुस्तकालय भेजा जाएगा,ताकि वे इन दुर्लभ ग्रंथों,लिपियों एवं भाषाई परंपराओं का गहन अध्ययन कर सकें।
इस अवसर पर ताजिकिस्तान गणराज्य के राजदूत लुकमोन बोबोकालोंज़ोदा ने रामपुर रज़ा पुस्तकालय के भ्रमण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वह इस आमंत्रण तथा आज के उत्कृष्ट आयोजन के लिए पुस्तकालय प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।उन्होंने कहा कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय एक असाधारण एवं अत्यंत समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है,जहाँ संरक्षित संग्रह केवल भारत और ताजिकिस्तान ही नहीं,बल्कि सम्पूर्ण मानवता की साझा विरासत का प्रतिनिधित्व करता है।कहा कि पुस्तकालय में संरक्षित अनेक दुर्लभ पांडुलिपियाँ उत्कृष्ट अवस्था में सुरक्षित हैं,जो भारत और ताजिकिस्तान के मध्य ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।पुस्तकालय जैसे संस्थान न केवल ज्ञान और संस्कृति के संरक्षण के केंद्र हैं,बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाते हैं।महामहिम राजदूत ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय में अनेक अद्वितीय एवं मूल पांडुलिपियाँ संरक्षित हैं।उन्होंने कहा कि भारत के अनेक प्रसिद्ध कवियों एवं विद्वानों ने फारसी तथा ताजिक साहित्य और काव्य परंपरा को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है,जिसकी झलक यहाँ सुरक्षित दुर्लभ ग्रंथों एवं पांडुलिपियों में देखने को मिलती है।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पुस्तकालय में संरक्षित ये अमूल्य ग्रंथ एवं पांडुलिपियाँ भविष्य में व्यापक स्तर पर शोध,अध्ययन एवं प्रकाशन के माध्यम से विद्यार्थियों,शोधार्थियों तथा विद्वानों के लिए उपलब्ध कराई जाएँगी।उन्होंने कहा कि ताजिकिस्तान और रामपुर रज़ा पुस्तकालय के मध्य सहयोग को आगे बढ़ाने तथा दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार हेतु विभिन्न संस्थानों के साथ संपर्क स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।महामहिम राजदूत ने कहा कि ताजिकिस्तान की अकादमिक एवं शोध संस्थाएँ रामपुर रज़ा पुस्तकालय के साथ सहयोग के लिए पूर्णतः तैयार हैं।ताजिकिस्तान में साहित्य संस्थान तथा हस्त लिखित पांडुलिपियों के अध्ययन एवं संरक्षण से संबंधित विशिष्ट केंद्र कार्यरत हैं,जो रामपुर रज़ा पुस्तकालय के साथ संयुक्त शोध,अध्ययन,संरक्षण एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग स्थापित करने के इच्छुक हैं।उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के लिए यह सहयोग पारस्परिक रूप से लाभकारी सिद्ध होगा।कहा कि आज की यह बैठक भविष्य के सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक कदम है।उन्होंने आशा व्यक्त की कि निकट भविष्य में दोनों पक्ष विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत औपचारिक दस्तावेजों एवं समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करेंगे तथा साझा सांस्कृतिक एवं अकादमिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए मिलकर कार्य करेंगे।
बैठक के समापन के पश्चात राजदूत लुकमोन बोबोकालोंज़ोदा ने पुस्तकालय में संरक्षित दुर्लभ एवं ऐतिहासिक पांडुलिपियों का अवलोकन किया।उन्होंने विशेष रूप से दीवान-ए-बेदिल,ज़खीरा-ए-ख़्वारज़्मशाही,रागमाला एल्बम इत्यादी का अवलोकन किया।इसके पश्चात उन्होंने पुस्तकालय के भव्य दरबार हॉल,पांडुलिपि अनुभाग तथा संरक्षण प्रयोगशाला का भी भ्रमण किया।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
