संत कबीर नगर।* उप कृषि निदेशक डा0 राकेश कुमार सिंह ने बताया है कि विकास खंड खलीलाबाद स्थित ब्लॉक संसाधन केंद्र में प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों हेतु श्रीअन्न (मोटे अनाज) विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को श्रीअन्न के पोषण एवं स्वास्थ्य लाभ, खेती की उन्नत तकनीकों तथा दैनिक आहार में इनके उपयोग के प्रति जागरूक करना था, ताकि वे विद्यालयों में बच्चों एवं अभिभावकों के बीच श्रीअन्न के महत्व की जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचा सकें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, संत कबीर नगर की ओर से कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से शिक्षकों को श्रीअन्न के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्रदान की। उन्होंने बाजरा, ज्वार, रागी, कोदो, कुटकी एवं सांवा आदि श्रीअन्न फसलों की उपयोगिता एवं महत्व के बारे में विस्तार से बताया।
डॉ. देवेश कुमार ने बताया कि मोटे अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ-साथ बदलती जलवायु, कम पानी की उपलब्धता एवं प्रतिकूल कृषि परिस्थितियों में भी महत्वपूर्ण फसलें हैं। वर्तमान समय में श्रीअन्न को केवल पारंपरिक अनाज के रूप में नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा, जल संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखने की आवश्यकता है। इनमें फाइबर, खनिज तत्व तथा अन्य आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो संतुलित आहार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को श्रीअन्न के पौष्टिक महत्व की जानकारी सरल, रोचक एवं व्यवहारिक तरीके से दें तथा विद्यालयों में श्रीअन्न आधारित जागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा दें। उन्होंने श्रीअन्न की उन्नत खेती की तकनीक, उपयुक्त फसल एवं किस्म का चयन, बुवाई का उचित समय, बीज दर, खाद एवं उर्वरक प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण तथा कटाई के बाद प्रबंधन से संबंधित आवश्यक तकनीकी जानकारी भी प्रदान की। प्रशिक्षण के दौरान श्रीअन्न से तैयार किए जाने वाले विभिन्न पौष्टिक एवं स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों के बारे में भी जानकारी दी गई, जिससे शिक्षक बच्चों एवं अभिभावकों को दैनिक आहार में श्रीअन्न को शामिल करने के लिए प्रेरित कर सकें।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने श्रीअन्न की खेती, पोषण, उपयोग एवं प्रसंस्करण से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. देवेश कुमार द्वारा तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी के साथ समाधान किया गया। उन्होंने कहा कि विद्यालय बच्चों में स्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। ऐसे में शिक्षकों की भूमिका श्रीअन्न के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा बच्चों एवं उनके परिवारों तक इसके महत्व को पहुंचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में विकास खंड खलीलाबाद के सहायक विकास अधिकारी (कृषि) राम चौन जी, भूमि संरक्षण अधिकारी शशांक शेखर शुक्ला जी, सहायक विकास अधिकारी विजय प्रकाश पाण्डेय जी सहित संबंधित अधिकारी, कर्मचारी एवं प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक आदि उपस्थित रहे।