हिमाचल हाईकोर्ट ने 15 वकीलों को सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया, अधिसूचना जारी
सूची में 14 पुरुष और एक महिला अधिवक्ता शामिल हैं।
- हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 15 अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया।
- नामांकन तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।
- फैसला अधिवक्ता अधिनियम, 1961 और सीनियर एडवोकेट्स रूल्स, 2025 के तहत लिया गया।
शिमला। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ता (सीनियर एडवोकेट) के रूप में नामित किया है। इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई। अधिसूचना के अनुसार यह नामांकन तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
यह निर्णय अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16(2) और हाईकोर्ट ऑफ हिमाचल प्रदेश (डिज़िग्नेशन ऑफ सीनियर एडवोकेट्स) रूल्स, 2025 के नियम 4 के तहत लिया गया है।
जिन अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया गया है, उनमें अजय चंदेल, अखिल सैनी चोपड़ा, अरविंद शर्मा, दीपक गुप्ता, देश राज, करण सिंह कनवर, मनोज पाठक, ओंकार नाथ जयरथ, राहुल गुप्ता, राम मूर्ति बिष्ट, शुभा महाजन, सुमीत राज शर्मा, सुरेंद्र कुमार शर्मा, विकास राठौर और विक्रांत ठाकुर शामिल हैं। इस सूची में 14 पुरुष और एक महिला अधिवक्ता हैं। अधिसूचना के अनुसार सभी नामांकन तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
अधिसूचना में कहा गया है कि आदेश की प्रतियां जानकारी और आवश्यक कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के महासचिव, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, बार काउंसिल ऑफ हिमाचल प्रदेश, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन शिमला, देश के सभी हाईकोर्टों के रजिस्ट्रार जनरल, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के सचिवालयों और रजिस्ट्री के संबंधित अधिकारियों सहित अन्य संबद्ध पक्षों को भेजी गई हैं।
साथ ही, हाईकोर्ट ऑफ हिमाचल प्रदेश (डिज़िग्नेशन ऑफ सीनियर एडवोकेट्स) रूल्स, 2025 के नियम 5 के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिसूचना हाईकोर्ट के आदेश से जारी की गई है।
वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा न्यायिक व्यवस्था में अधिवक्ताओं की योग्यता, अनुभव और पेशेवर योगदान के सम्मान के रूप में देखा जाता है। यह दर्जा मिलने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ताओं को अदालत में कुछ विशेष अधिकार और जिम्मेदारियां मिलती हैं।
उन्हें अदालत की सामने वाली बेंच, जिसे इनर बार कहा जाता है, में बैठने का विशेषाधिकार प्राप्त होता है। अदालत में मामलों की सुनवाई के दौरान उन्हें सामान्य अधिवक्ताओं की तुलना में पहले अपनी दलील रखने और बहस करने की प्राथमिकता भी दी जाती है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं के आचरण और कार्यप्रणाली पर अधिवक्ता अधिनियम तथा संबंधित नियमों के तहत कुछ विशेष प्रावधान भी लागू होते हैं।
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