सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय के आदेशों के मद्देनजर स्कूल-कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के मामले पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लिया है। न्यायाधीश दिनेश मेहता की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।
उच्च न्यायालय ने नोटिस जारी कर पूछा है कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन की दिशा में उनके बर्थ कंट्रोल और वैक्सीन लगाने के लिए क्या कदम उठाए गए।
आवारा कुत्तों पर उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि दिल्ली में आवारा कुत्तों को शेल्टर होम से तभी छोड़ा जाएगा जब उन्हें टीका (इम्युनाइजेशन) लग जाएगा और बधियाकरण हो जाएगा। न्यायाधीश विक्रमनाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि शेल्टर होम से आवारा कुत्तों को छोड़ने पर लगी रोक को इस बदलाव के साथ हटाया जा रहा है।
उच्चतम न्यायालय ने साफ किया था कि जो कुत्ते आक्रामक स्वभाव के हैं और जिन्हें रेबीज की बीमारी है उन्हें शेल्टर होम से नहीं छोड़ा जाएगा। न्यायालय ने कहा कि सड़कों पर आवारा कुत्तों को खाना नहीं खिलाया जा सकता है। आवारा कुत्तों को खिलाने के लिए जगह नगर निगम की ओर से तय की जाए। अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के इसी आदेश के अनुपालन के लिए इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
