बाढ़ से पहले ही जर्जर हुआ करोड़ों की लागत से बना आपदा भवन, ग्रामीणों ने उठाए सवाल
भवन की बदहाली सरकारी योजनाओं पर उठाए गंभीर सवाल
- जिलाधिकारी ने टेढ़ागाछ प्रखंड के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा
किशनगंज। टेढ़ागाछ प्रखंड की चिल्हनियां पंचायत में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित बाढ़ आश्रय सह आपदा भवन बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। आगामी बाढ़ को देखते हुए इस भवन की जर्जर हालत प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस भवन का निर्माण बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, वह आज स्वयं असुरक्षित हो चुका है। हाल ही में जिलाधिकारी नवीन कुमार ने टेढ़ागाछ प्रखंड के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा की थी। इस दौरान उन्होंने अंचलाधिकारी शशि कुमार को बाढ़ से पूर्व सभी आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का निर्देश दिया था।
ये खबर भी पढ़े : बिहार बंद के दौरान कई जिलों में हिंसा: पटना में लाठीचार्ज, सीवान में फायरिंग और पथरावहालांकि, चिल्हनियां पंचायत स्थित बाढ़ आश्रय सह आपदा भवन की स्थिति प्रशासनिक दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। भवन की दीवारों में कई जगह दरारें पड़ गई हैं। कई हिस्से जर्जर हो चुके हैं और लंबे समय से रखरखाव नहीं होने के कारण भवन उपयोग के योग्य नहीं रह गया है। परिसर में साफ-सफाई का अभाव है। पेयजल, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
भवन के शौचालय क्षतिग्रस्त हैं, जबकि कई स्थानों पर फर्श भी टूट चुका है। अंचलाधिकारी शशि कुमार ने बताया कि चिल्हनियां पंचायत स्थित बाढ़ आपदा भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी जिलाधिकारी को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि भवन को जल्द ही सुदृढ़ कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ताकि बाढ़ के दौरान इसका उपयोग किया जा सके। पूर्व पंचायत समिति सदस्य सीता देवी ने कहा कि भवन पूरी तरह उपेक्षित है। यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं कराई गई तो बाढ़ के दौरान प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना मुश्किल होगा।
उन्होंने डीएम से मांग की कि बाढ़ आने से पहले भवन की तत्काल मरम्मत कर पेयजल, बिजली, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं बहाल की जाएं। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि बाढ़ पूर्व तैयारियों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब आश्रय भवनों को समय रहते सुरक्षित और उपयोग योग्य बनाया जाएगा। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस भवन की बदहाली सरकारी योजनाओं के रखरखाव पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
