नालंदा विश्वविद्यालय ने भारत और मंगोलिया के बीच शैक्षणिक ,सांस्कृतिक सहयोग को दी नई ऊंचाई

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नालंदा। राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय ने भारत और मंगोलिया के बीच शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में दो प्रमुख समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों से दोनों देशों के बीच ज्ञान, संस्कृति, बौद्ध अध्ययन और शोध के क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।

पहला समझौता ज्ञापन उलानबटार स्थित ऐतिहासिक गंदनतेगचिनलेन मठ (गंदन मठ) में नालंदा विश्वविद्यालय और गंदन मठ के बीच संपन्न हुआ। इस समझौते पर नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी तथा गंदनतेगचिनलेन मठ के प्रमुख और सर्वोच्च धर्माध्यक्ष गेशे ल्हारम्पा जावज़ंदोरज दुलमरागचा (खाम्बा नोमुन खान) ने हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, मंगोलिया में भारत के राजदूत अतुल मल्हारी गोटसुरवे, अरखंगाई प्रांत के गवर्नर बी. त्सेरेननादमिद, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा भारत के विभिन्न बौद्ध मठों से आए भिक्षु उपस्थित रहे।

यह साझेदारी भारत और मंगोलिया की साझा बौद्ध विरासत पर आधारित है। समझौते के तहत संयुक्त अनुसंधान, शैक्षणिक आदान-प्रदान, संयुक्त प्रकाशन, सेमिनार और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही दुर्लभ बौद्ध पांडुलिपियों के अध्ययन, संरक्षण और उनके वैश्विक प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे प्राचीन नालंदा की ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

उसी दिन उलानबटार स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मंगोलिया (एनयूएम) में नालंदा विश्वविद्यालय और एनयूएम के बीच दूसरा महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन संपन्न हुआ। इस समझौते पर नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मंगोलिया की उपाध्यक्ष (अनुसंधान एवं सहयोग) प्रोफेसर बातारचुलून त्सेरमा ने हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर दोनों विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और प्रतिनिधि मौजूद रहे। समझौते के तहत धर्म अध्ययन, बौद्ध दर्शन, संस्कृति एवं कला, इतिहास, पारिस्थितिकी, संस्कृत एवं तिब्बती भाषा, व्यापार तथा आर्थिक इतिहास सहित विभिन्न विषयों में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसके अलावा दोनों संस्थानों के बीच छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान कार्यक्रम, संयुक्त शोध परियोजनाएं, अकादमिक प्रशिक्षण, कार्यशालाएं तथा ज्ञान-साझाकरण की विभिन्न पहलें संचालित की जाएंगी। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन और अनुसंधान के नए अवसर प्राप्त होंगे।

नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि इन साझेदारियों का सबसे बड़ा लाभ छात्रों और शोधार्थियों को मिलेगा। इससे उन्हें वैश्विक स्तर के शैक्षणिक संसाधनों, विशेषज्ञों और अनुसंधान अवसरों तक पहुंच मिलेगी, जिससे उनके अध्ययन और शोध का अनुभव और अधिक समृद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों के बीच संवाद एवं सहयोग को बढ़ावा देना भी है। मंगोलिया के साथ हुए ये समझौते इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और मंगोलिया के बीच ज्ञान और संस्कृति का यह नया सेतु वैश्विक शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। यह पहल नालंदा विश्वविद्यालय की उस ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाती है, जिसने सदियों पहले एशिया और विश्व के अनेक देशों को ज्ञान के सूत्र में बांधा था।

इन समझौतों के माध्यम से नालंदा विश्वविद्यालय न केवल अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक शांति, सांस्कृतिक संवाद और सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध जिम्मेदार वैश्विक नागरिक तैयार करने के अपने मिशन को भी आगे बढ़ाएगा।

लेखक के बारे में

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सुधा जायसवाल ने मास कम्युनिकेशन एवं पत्रकारिता (MJMC) में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है और पत्रकारिता क्षेत्र में 12 वर्षों से सक्रिय हैं। वह अमर उजाला, स्वतंत्र भारत, जनसंदेश टाइम्स और तरुण मित्र जैसे संस्थानों में कार्य कर चुकी हैं। राजनीतिक, शिक्षा और नगर निगम सहित विभिन्न बीट्स पर रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाली सुधा वर्तमान में तरुण मित्र के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं।

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