बिहार: 30 फीट गहरे बोरवेल में गिरा 3 साल का मासूम, NDRF ने बचाई जान
NDRF ने 4 घंटे के अभियान के बाद सुरक्षित निकाला
- गया के रंगु नगर गांव में हुआ हादसा।
- 3 साल का पीयूष खेलते समय बोरवेल में गिरा।
- ऑक्सीजन की व्यवस्था कर शुरू किया गया रेस्क्यू।
बिहार: बिहार में गया के फतेहपुर प्रखंड के गुरपा थाना इलाके के रंगु नगर गांव में तीन साल का पीयूष कुमार खेलते-खेलते बोरवेल में गिर गया था. यह खुला बोरवेल खेत के किनारे थे. पीयूष मोबाइल लिए खेल रहा था, उसी दौरान वह गिरा तो करीब 30 फीट गहराई में चला गया.
पीयूष की मां खेत में पाइप बिछाने के काम में लगी थीं. उनका बेटा पास ही खेल रहा था. तभी अचानक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी.
पहले लगा कहीं आसपास होगा, लेकिन कुछ सेकंड बाद पता चला कि आवाज जमीन के नीचे से आ रही है. गांव में हड़कंप मच गया. लोग दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे. किसी ने पुलिस को फोन किया तो किसी ने प्रशासन को.
कुछ ही देर में गुरपा थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई. सबसे पहली चुनौती थी कि बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाई जाए. बोरवेल में पाइप डालकर लगातार ऑक्सीजन दी गई, ताकि मासूम की सांसें चलती रहें, लेकिन असली चुनौती थी उसे सुरक्षित बाहर निकालना.
मामले की गंभीरता देखते हुए पटना से NDRF की टीम को बुलाया गया. टीम ने आते ही पूरे इलाके का जायजा लिया और रेस्क्यू शुरू कर दिया. हर मिनट कीमती था. नीचे फंसा बच्चा, ऊपर बेचैन मां और चारों तरफ हजारों उम्मीदें.
करीब चार घंटे तक चले इस ऑपरेशन में NDRF के जवान बेहद सावधानी से आगे बढ़ते रहे. जरा-सी चूक बच्चे की जान पर भारी पड़ सकती थी. इसलिए हर कदम बेहद सूझबूझ के साथ रखा गया. आखिरकार वो पल आया, जिसका पूरे गांव को इंतजार था. जवानों ने पीयूष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.
जैसे ही बच्चा बाहर आया, पूरे गांव में तालियां गूंज उठीं. लोगों ने राहत की सांस ली. कई ग्रामीण खुशी से भावुक हो पड़े. किसी ने भगवान का शुक्रिया अदा किया तो किसी ने NDRF के जवानों के लिए जयकारे लगाए.
रेस्क्यू के तुरंत बाद NDRF के जवानों ने सबसे पहले प्यास से बेहाल पीयूष को पानी पिलाया. इसके बाद उसे सीधे फतेहपुर स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांच की. डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है. एहतियात के तौर पर उसे निगरानी में रखा गया है और दोबारा स्वास्थ्य परीक्षण के बाद घर भेजा जाएगा.
पीयूष की मां ने बताया कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उनका बेटा कब बोरवेल के पास चला गया. उन्होंने कहा कि मैं पाइप बिछा रही थी. पीयूष मोबाइल से खेल रहा था. अचानक उसकी रोने की आवाज आई. तब पता चला कि वो बोरवेल में गिर गया है.
गया की यह घटना उन खुले बोरवेलों पर सवाल है, जिन्हें काम खत्म होने के बाद खुला छोड़ दिया जाता है. हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे हादसे सामने आते हैं, लेकिन इसके बावजूद लापरवाही खत्म नहीं होती.
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लेखक के बारे में
माही खान एक उभरती हुई कंटेंट राइटर हैं और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए समाचार अपडेट का कार्य कर रही हैं। वह खबरों की प्रस्तुति पर विशेष ध्यान देती हैं और मीडिया क्षेत्र में सीखते हुए अपने लेखन कौशल को लगातार विकसित कर रही हैं।
