कांवड़ यात्रा क्या है, क्या है इसका महत्व, श्रीराम और रावण भी लाए थे कांवड़
हर वर्ष के 30 जुलाई से सावन के महीने की होती शुरूआत
- कांवड़ यात्रा: भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति का महापर्व
कावड़ यात्रा भारत की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासत है। इस साल 30 जुलाई से सावन के महीने की शुरूआत होगी। इसी दिन से कांवड़ यात्रा की शुरुआत होती है। कांवड़ यात्रा भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। कांवड़ यात्रा में शिवभक्त अपनी अपनी श्रद्धानुसार कांवड़ उठाते हैं। यह बातें काशी के विद्वान एवं ज्योतिषाचार्य प्रसाद दीक्षित ने एक विशेष बातचीत में बतायी।
उन्होंने बताया कि सावन में जो भी शिवभक्त कांवड़ यात्रा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गौरतलब है इस साल कांवड़ मेला 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त (सावन शिवरात्रि) तक चलेगा।
ये खबर भी पढ़े : भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना का दावा, वेस्ट बैंक में रोके रखा गया प्रतिनिधिमंडलक्या है कांवड़ यात्रा
उन्होंने बताया कि कांवड़ यात्रा को सीधे तौर पर भगवान शिव से जोड़ा जाता है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए ये यात्रा की जाती है। कांवड़ यात्रा श्रद्धा के साथ ही सहनशक्ति और सामूहिक एकता की यात्रा है। कांवड़ यात्रा से अंतर्मन शुद्ध होता है। कांवड़ शिव भक्ति की यात्रा है। कांवड़ यात्रा के दौरान मांस मदिरा का सेवन नहीं किया जाता है। इस दौरान तामसिक भोजन भी वर्जित होता है। कांवड़ यात्रा शरीर के साथ—साथ मन की भी यात्रा होती है। कांवड़ यात्रा में 10 दिन बेहद ही अनुशासन से भरे होते हैं। इन्ही दिनों को अपने जीवन में उतारने की सीख भी कांवड़ यात्रा से मिलती है।
राम, रावण और श्रवण ने की थी कांवड़ यात्रा
उन्होंने बताया कि कांवड़ यात्रा को लेकर कई पौराणिक मान्यताएं हैं। कथा के अनुसार भगवान परशुराम ने अपने आराध्य देव शिव के नियमित पूजन के लिए पुरा महादेव (जनपद बागपत) में मंदिर की स्थापना की। परशुराम ने कावड़ में गंगाजल लाकर पूजन कर कावड़ परंपरा की शुरुआत की। वर्तमान में देशभर में कांवड़ यात्रा काफी प्रचलित है। कथा के अनुसार कावड़ परंपरा शुरू करने वाले भगवान परशुराम की पूजा भी श्रावण मास में की जानी चाहिए। परशुराम श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को कावड़ में जल लाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते थे।
दूसरी कथा के अनुसार शिव का परम भक्त लंका नरेश रावण पहला कांवड़िया था। रावण भी शिव को प्रसन्न करने के लिए कांवड़ में गंगाजल लेकर आता था और जलाभिषेक करता था। मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने भी शिव की पूजा करने के साथ कावड़ लाकर गंगाजल का अभिषेक किया। कांवड़ को लेकर कई अन्य कथाएं भी प्रचलित हैं।
कांवड़ यात्रा का महत्व
कांवड़ यात्रा का समता और भाईचारे का संदेश देती है। इसके साथ ही कांवड़ यात्रा एकजुटता के साथ किसी भी कार्य को करने का संदेश देती है। वहीं तामसिक वस्तुओं दूर रहने का भी इस यात्रा के जरिये संदेश मिलता है। कांवड़ यात्रा जप, तप और व्रत की यात्रा है। कांवड़ यात्रा आपको अध्यात्म से जोड़ती है। इसके साथ ही ये यात्रा काम क्रोध पर विजय भी का प्रतीक है।
कांवड़ यात्रा के प्रकार
सामान्य कांवड़डाक कांवडखड़ी कांवड़दांडी कांवड़
समय के साथ बदली कांवड़
वरिष्ठ पत्रकार रजनीकान्त वशिष्ठ ने बताया कि पौराणिक समय से आधुनिक काल तक का सफर तय करते हुए कांवड़ के स्वरूप और आस्था में भी काफी बदलाव हुआ है। अब काफी संख्या में शिव भक्त अपने वाहन पर गंगाजल लेकर भोले पर चढ़ाने के लिए निकलते हैं। डाक कांवड़ के दौरान डीजे की तेज आवाज और भव्य साज-सज्जा का पूरा ध्यान रखा जाने लगा है। उधर, पहले गंगोत्री और हरिद्वार का पैदल रास्ता दुर्गम होने के कारण गंगाजल लेकर आने वालों की संख्या गिनती की होती थी,लेकिन अब कांवड़ मार्गो पर प्रशासन की बेहतर व्यवस्था और शिविरों की बढ़ती संख्या ने कांवड़ यात्रा को काफी आसान कर दिया है।
सावन सोमवार 2026 तिथियां
पंचांग के अनुसार इस साल कुल 4 सावन सोमवार व्रत पड़ेंगे। पहला सोमवार- 03 अगस्तदूसरा सोमवार- 10 अगस्ततीसरा सोमवार- 17 अगस्तचौथा सोमवार- 24 अगस्त
उत्तर प्रदेश में कैसी हैं तैयारियां
उत्तर प्रदेश में आगामी 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा के लिए शासन और प्रशासन ने कड़े सुरक्षा प्रबंध,रूट डायवर्जन और हाईटेक निगरानी की व्यापक तैयारियां की हैं। इस बार 'जीरो इंसिडेंट, जीरो एक्सीडेंट' के मंत्र के साथ सुरक्षा का कड़ा चक्रव्यूह तैयार किया गया है। ड्रोन से मेला क्षेत्र पर नजर रखी जायेगी। कांवड़ियों के लिए जगह—जगह पानी की टंकियां, शौचालय और पथ प्रकाश की व्यवस्था के साथ साथ सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम की टीमें लगाई गई हैं। उत्तराखण्ड शासन ने भी कांवड़ यात्रा के लिये व्यापक तैयारियां की है।
5 करोड़ से ज्यादा कांवड़ियों के आने की उम्मीद
वर्ष 2025 के कांवड़ मेले में हरिद्वार लगभग 4.5 करोड़ (45 मिलियन) कांवड़िए आए थे। इस बार 5 करोड़ से ज्यादा कांवड़ियों के हरिद्वार कांवड़ मेले में आने की उम्मीद है।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
