शुतुरमुर्ग की पाचन क्रिया के बारे में दिलचस्प बात जानिए

Published By Subhash Pandey
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शुतुरमुर्ग :विश्व के सबसे बड़े पक्षियों में शुमार शुतुरमुर्ग अपनी अनूठी शारीरिक बनावट और खाने-पीने की आदतों के लिए मशहूर है। दरअसल, शुतुरमुर्ग की चोंच में दांत नहीं होते, इसी वजह से वह अपने खाने को चबाने के बजाय सीधे निगल लेते हैं। लेकिन फिर भी, खाने को बिना चबाए पचाना उसके लिए कोई मुश्किल काम नहीं होता है, क्योंकि कुदरत ने शुतुरमुर्ग को एक स्पेशल पाचन प्रणाली दी होती है।

खास तरीके से खाना पचाता है शुतुरमुर्ग
 शुतुरमुर्ग खाने को पचाने के लिए रेत और कंकड़-पत्थर निगल लेता है। ये पत्थर शुतुरमुर्ग के पेट के एक खास हिस्से ‘गिजार्ड’ में जाकर इकट्ठा हो जाते हैं, जो खाने को पचाने में महत्वपूर्ण रोल निभाता है। बता दें कि गिजार्ड एक मांसल थैली जैसी होती है, जो सिकुड़ती रहती है और शुतुरमुर्ग के निगले पत्थरों को ‘दांतों’ के जैसे प्रयोग करती है।

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शुतुरमुर्ग का गिजार्ड ऐसे करता है काम
जब शुतुरमुर्ग खाना निगलता है, तो यह गिजार्ड उन पत्थरों की सहायता से उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है। खासतौर पर बीजों, सख्त पौधों और रेशेदार भोजन को पीसने में शुतुरमुर्ग के लिए यह प्रक्रिया बहुत जरूरी होती है। यही कारण है कि दांतों के बिना भी शुतुरमुर्ग आसानी से अपना खाना पचा लेता है।

1 किलोग्राम तक पत्थर निगल लेता है शुतुरमुर्ग
रिपोर्ट के मुताबिक, एक शुतुरमुर्ग अपने गिजार्ड में लगभग 1 किलोग्राम तक पत्थर इकट्ठा कर सकता है। ये पत्थर वक्त के साथ घिस जाते हैं और चिकने हो जाते हैं। फिर, शुतुरमुर्ग नए पत्थर निगल लेते हैं। यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, जो शुतुरमुर्ग के पाचन तंत्र को सुचारु बनाती है।

यह अनूठी व्यवस्था हमें दिखाती है कि कुदरत ने दुनिया में मौजूद हर जीव को उसकी जरूरतों और वातावरण के मुताबिक खास तरीके से विकसित किया है। शुतुरमुर्ग भी इसका एक उदाहरण है।

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लेखक के बारे में

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सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।

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