देश भर में काली कमाई के अंबार लगाते भ्रष्टाचारी अधिकारी: मनोज कुमार अग्रवाल
आय से अधिक संपत्ति मामले में इंजीनियर अरविंद कुमार चौधरी पर EOU की बड़ी कार्रवाई
बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने लघु सिंचाई प्रमंडल, सासाराम के एग्जिक्यूटिव इंजीनियर अरविंद कुमार चौधरी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। आर्थिक अपराध की टीम ने बुधवार सुबह उनके 6 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। सत्यापन के दौरान यह प्रथमदृष्टया सामने आया कि अरविंद कुमार चौधरी ने 1,19,98,534 रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है।
एजेंसी का दावा है कि यह उनकी ज्ञात आय से करीब 85.05 प्रतिशत अधिक है। इसी आधार पर तलाशी की कार्रवाई की जा रही जांच टीमें एक साथ 6 अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी अभियान चला रही हैं। इनमें पटना के दानापुर स्थित आदमपुर में वीनस पैराडाइज अपार्टमेंट के चौथे टावर का फ्लैट नंबर-405, आशोपुर स्थित वीनस इम्पायर का फ्लैट नंबर-1301 (यूनिट-01), मुजफ्फरपुर के महामाया स्थान स्थित मकान नंबर-66, सासाराम स्थित लघु सिंचाई प्रमंडल का कार्यपालक अभियंता कार्यालय, डेहरी ऑन सोन का सरकारी आवास और बांका जिले के रजौन थाना क्षेत्र के पीपराडीह गांव स्थित अरविंद कुमार का पैतृक मकान शामिल हैं।
छापेमारी के दौरान सामने आई तस्वीरों में बड़ी मात्रा में कैश, सोने और चांदी के गहने, चांदी के सिक्के, कीमती घड़ियां, चांदी के बर्तन और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज दिखाई दे रहे हैं। एक तस्वीर में नोटों की कई गड्डियां, घड़ियां और चांदी के बर्तन रखे हुए नजर आते हैं। वहीं दूसरी तस्वीर में सोने के हार, कंगन, झुमके, अंगूठियां, चांदी के सिक्के और अन्य आभूषण व्यवस्थित तरीके से बॉक्स में रखे दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इन सामानों का अंतिम मूल्यांकन तलाशी पूरी होने और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।फिलहाल आर्थिक अपराध शाखा की तलाशी की कार्रवाई जारी है और अलग-अलग जगहों को खंगाला जा रहा है। आपको बता दें कि मई में भी बिहार के एक सरकारी इंजीनियर के यहां हुई छापेमारी में भारी मात्रा में संपत्ति मिली थी।
भारत में भ्रष्टाचारी अधिकारियों की धर-पकड़ और उनसे अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त (राजसात) करने के लिए बेहद कड़े कानूनी प्रावधान और सक्रिय जांच एजेंसियां काम कर रही हैं। हाल ही में जुलाई 2026 में ही उत्तर प्रदेश विजिलेंस और कर्नाटक लोकायुक्त द्वारा की गई बड़ी छापेमारी इस बात का जीवंत उदाहरण हैं, जहां भ्रष्ट अधिकारियों के गुप्त लॉकरों से करोड़ों रुपये नकद और किलो के हिसाब से सोना बरामद किया गया है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश सतर्कता विभाग ने जुलाई 2026 में आगरा के पूर्व सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ललित कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है. विजिलेंस टीम ने उनके लखनऊ स्थित अलीगंज आवास पर छापेमारी कर करीब ₹35 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति का खुलासा किया है, जिसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी जांच और कार्रवाई को तेज कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश सतर्कता विभाग की छापेमारी में 1.62 करोड़ नकद मिले.लगभग 13 किलोग्राम सोना और 9 किलोग्राम चांदी (बिस्किट, बार और आभूषण के रूप में) जब्त की गई, जिसकी कीमत करीब ₹20 करोड़ आंकी गई है. लखनऊ, नोएडा, बाराबंकी और रायबरेली में कई मकानों, भूखंडों (प्लॉट्स), फ्लैटों और कृषि भूमि से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनकी कीमत ₹13 करोड़ के आसपास है.बैंक खातों, म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट और पोस्ट ऑफिस स्कीमों में ₹1 करोड़ से अधिक के निवेश के दस्तावेज मिले. इसके अलावा दो लग्जरी कारें इनोवा और आइ20 और एक रिवॉल्वर भी बरामद की गई है।
₹300 की घूस की शिकायत से खुला राज इस विशाल साम्राज्य का पर्दाफाश साल 2020 में हुई एक छोटी सी शिकायत से शुरू हुआ था। ललित कुमार जब कानपुर में तैनात थे, तब उन पर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए ₹300 की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। तत्कालीन परिवहन आयुक्त की अनुमति के बाद एंटी-करप्शन और विजिलेंस विभाग ने उनकी गोपनीय जांच शुरू की, जिससे उनकी आय से अधिक संपत्ति के इस बड़े मामले की परतें खुलती चली गईं. ललित कुमार अक्टूबर 2025 में आगरा से सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) हुए थे।
इस से छह दिन पूर्व 4 जुलाई को अकोला अकोला में हाल ही में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने किरण पुरुषोत्तम चौधरी सह-जिला निबंधक तथा मुद्रांक जिलाधिकारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कीl उनके खिलाफ ₹10,000 रिश्वत लेने का मामला दर्ज होने के बाद उनके जलगांव स्थित आवास पर छापेमारी की गई, जहां से ₹2.94 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति बरामद हुई हैl किरण पुरुषोत्तम चौधरी, तत्कालीन अतिरिक्त जिला रजिस्ट्रार और स्टाम्प ड्यूटी अधिकारी (श्रेणी-I), अकोला महारा एसीबी ने उन्हें 26 जून को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए पकड़ा थाl जलगांव स्थित घर पर छापेमारी कर ₹1.53 करोड़ से अधिक नकद ₹60 लाख के सोने के बिस्किट व आभूषण तथा अन्य कीमती धातुएं जब्त की गई हैं l लगभग ₹62 लाख की बेनामी संपत्ति के कागजात भी मिले हैं ऊऊलगभगlयह जब्ती महाराष्ट्र के नासिक, अकोला और जलगांव की एसीबी टीमों द्वारा संयुक्त रूप से की गई है।
इसी सप्ताह तेलंगाना के हैदराबाद में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस कंप्यूटर सर्विसेज में तैनात डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस संकीरेड्डी भीम रेड्डी को लगभग ₹300 करोड़ की अवैध बेनामी संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया है। एसीबी की टीम ने अधिकारी के तेलंगाना और कर्नाटक स्थित कुल 16 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। अधिकारी के ठिकानों से 2 किलोग्राम सोने के आभूषण और 20 किलोग्राम चांदी बरामद की गई है।
छापेमारी के दौरान उनके घर से ₹3.60 लाख और एक अन्य ठिकाने से ₹40 लाख कैश मिला। रिश्तेदारों और बेनामियों के नाम पर 50 एकड़ से अधिक कृषि भूमि, व्यावसायिक भूखंड, कई लग्जरी फ्लैट और आलीशान विला के दस्तावेज जब्त किए गए हैं। उनके बैंक खातों में लगभग ₹19.91 लाख जमा पाए गए हैं। कोर्ट ने आरोपी डीएसपी भीम रेड्डी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में चंचलगुड़ा केंद्रीय जेल भेज दिया है।
25 फरवरी 2026 तीस हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए खनन विभाग के उप निदेशक देवव्रत महांति की गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस की छापेमारी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।भुवनेश्वर स्थित उनके फ्लैट से 4 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद की गई। इसके अलावा, महांति के कार्यालय की दराज और उनके पास से 1.20 लाख रुपये नकद भुवनेश्वर के पहाल क्षेत्र में लगभग 2400 वर्गफुट में बना एक भव्य दो मंजिला मकान, करीब 130 ग्राम सोना जब्त किया है।
उधर 9 जून 2026 भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में, तेलंगाना एंटी-करप्शन ब्यूरो ने रोड्स एंड बिल्डिंग्स विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ जे. मोहन नाइक और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी कई प्रॉपर्टीज़ पर एक साथ छापे मारे. उन पर आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं ज़्यादा संपत्ति जमा करने का आरोप है।
यह तलाशी हैदराबाद और राज्य के अन्य हिस्सों सहित लगभग 15 जगहों पर की गई. सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान अधिकारियों को सोने के बिस्किट, गहने, चांदी की चीजें, कैश और प्रॉपर्टी से जुड़े कई दस्तावेज़ मिले हैं. शुरुआती अनुमानों के अनुसार, जांच के दायरे में आई कुल संपत्ति की मार्केट वैल्यू 100 करोड़ रुपए से ज़्यादा हो सकती है।
ये तो सिर्फ बानगी नमूना भर है देश भर में करीब एक सौ सरकारी कर्मचारी अधिकारीयों के कब्जे से आय से अधिक जुटाई गयी करोड़ों अरबों की संपति मिल रही है। एक एक अधिकारी ने सौ से तीन चार सौ करोड़ तक की अवैध संपत्ति जुटाने का काम किया है जिस से पता चल जाता है कि भ्रष्टाचार किस हद तक बढ़ गया है।
केन्द्र में भारतीय जनतापार्टी की सरकार केन्द्र और विभिन्न प्रदेशों में आयी, भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टालरेंस का नारा तो रहा लेकिन स्थितियों में कोई विशेष अन्तर नहीं आया। इसके लिए सब कुछ डिजिटल आनलाइन करने की कवायद हुई वह चाहे टेंडर हो या अन्य जनउपयोगी सुविधाएं लेकिन राजस्व से लेकर कोई भी विभाग भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं है।
डबल इंजन की सरकार भी इससे मुक्त नहीं कर पायी है। भ्रष्टाचार के बारे जारी होने वाली ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 182 देशों की रिपोर्ट में भारत 91 वें स्थान पर है। यह संस्था सरकार संस्थाओं और सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की स्थिति का आकलन करती है और उसके आधार पर रैंकिंग तय करती है। यदि इस रैंक को न भी मानें तो भी आम आदमी से लेकर खास आदमी तक इससे प्रभावित है।सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए कि भ्रष्टाचार समाप्त होने के बजाय निरन्तर बढ़ता ही जा रहा है। सिर्फ जीरो टालरेंस का नारा देने से भ्रष्टाचार समाप्त नहीं हो सकता है।
निचले स्तर से लेकर उच्चस्तर पर कदम पर भ्रष्टाचार की विषबेल फैल रही हैं। पिछले दिनों एक हाइकोर्ट जज के आवास के कमरे में आग लगने पर नोटों से भरे बोरों का जलते देखा जाना और उस पर सटीक कारवाई नहीं किया जाने से पता चल जाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार और यहां तक कि न्यायपालिका भी पर्याप्त गंभीर नहीं है। जाहिर है कि देश की उन्नति में भ्रष्टाचार एक बड़ी बाधा है सरकार को गंभीरता से सख्त कदम उठाने चाहिए और आम चुनाव का मुद्दा भी भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग ही होना चाहिए क्योंकि पुलिस पटवारी से लेकर ऊंची न्याय की कुर्सियों तक भ्रष्टाचार की जड़ें देश को खोखला कर रहीं हैं और देश की तरक्की में बाधा उत्पन्न कर रहीं हैं।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
