आरबीआई की चेतावनी: बैंकिंग सुरक्षा पर एआई साइबर हमलों की चुनौती

डिजिटल बैंकिंग युग में एआई बना साइबर अपराधियों का सबसे खतरनाक हथियार

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प्रतिभा सिन्हा

  • आरबीआई बोला-अगले एक साल में सबसे बड़ा साइबर खतरा बन सकते हैं एआई हमले
  • कम आईटी निवेश पर भी चिंता, सुरक्षा ढांचा आधुनिक बनाने की बैंकों को नसीहत

नई दिल्ली। देश की बैंकिंग व्यवस्था एक ऐसे खतरे के मुहाने पर खड़ी है, जिसका चेहरा दिखाई नहीं देता, लेकिन जिसकी मार पूरे वित्तीय तंत्र को हिला सकती है। यह खतरा है कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित साइबर हमलों का। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी नवीनतम वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में साफ चेतावनी दी है कि आने वाले एक वर्ष में एआई से संचालित साइबर हमले बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर सकते हैं। 

केंद्रीय बैंक का कहना है कि अपराधी अब उसी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे दुनिया भविष्य की सबसे बड़ी ताकत मान रही है। आरबीआई के अनुसार, एआई ने साइबर अपराध की प्रकृति पूरी तरह बदल दी है। पहले जहां हैकरों को किसी नेटवर्क में सेंध लगाने में लंबा समय लगता था, वहीं अब एआई की मदद से बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियां तेजी से खोजी जा सकती हैं। ग्राहकों और बैंक कर्मचारियों को झांसे में लेने वाले फर्जी ई-मेल, संदेश और कॉल पहले से कहीं अधिक वास्तविक प्रतीत होते हैं। यही वजह है कि पारंपरिक साइबर सुरक्षा उपाय लगातार कमजोर पड़ते जा रहे हैं।

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रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था को नई तकनीक के अनुरूप मजबूत नहीं किया गया तो बैंकिंग सेवाओं में रुकावट, संवेदनशील वित्तीय डेटा की चोरी और डिजिटल भुगतान प्रणालियों पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे केवल किसी एक बैंक को नुकसान नहीं होगा, बल्कि पूरे वित्तीय तंत्र में ग्राहकों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है।

वैश्विक साइबर परिदृश्य का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट बताती है कि रूस में सबसे अधिक साइबर हमले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद यूक्रेन और भारत का स्थान है। तुर्की, मैक्सिको और चीन भी उन देशों में शामिल हैं जहां साइबर गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। इससे स्पष्ट है कि साइबर अपराध अब सीमाओं में बंधा अपराध नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

आरबीआई ने बैंकों की तैयारियों का भी आकलन किया। सर्वेक्षण में लगभग 98 प्रतिशत बैंकों ने अपने वर्तमान साइबर जोखिम को 'बहुत निम्न' से 'मध्यम' श्रेणी में रखा और अधिकांश संस्थानों ने जोखिम को नियंत्रित बताया। हालांकि केंद्रीय बैंक ने आगाह किया कि एआई आधारित हमलों की बदलती प्रकृति को देखते हुए केवल मौजूदा व्यवस्था पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं होगा।

रिपोर्ट का एक चिंताजनक पहलू सूचना प्रौद्योगिकी पर होने वाला खर्च भी है। वित्त वर्ष 2025-26 में 81 प्रतिशत बैंकों ने अपने कुल राजस्व का पांच प्रतिशत से कम हिस्सा आईटी पर खर्च किया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब अपराधी अत्याधुनिक एआई का इस्तेमाल कर रहे हों, तब साइबर सुरक्षा पर सीमित निवेश भविष्य में महंगा साबित हो सकता है। आरबीआई ने बैंकों को एआई आधारित सुरक्षा समाधान अपनाने, नियमित सुरक्षा आॅडिट और रेड-टीम परीक्षण कराने, थ्रेट इंटेलिजेंस को मजबूत करने तथा कर्मचारियों को लगातार प्रशिक्षित करने की सलाह दी है।  

लेखक के बारे में

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हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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