मोटा मुनाफा कमाना है तो जुलाई में लगाएं खीरा

Published By Subhash Pandey
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खीरे की खीते: जुलाई का महीना यानी मानसून की शुरुआत खेती-किसानी के लिए ढेर सारे मौके लेकर आती है. इस मौसम में अगर आप पारंपरिक फसलों के बजाय कुछ अलग और कम समय में तैयार होने वाली नकदी फसल यानी कैश क्रॉप चुनते हैं. तो आपकी किस्मत बदल सकती है. ऐसी ही एक बंपर कमाई कराने वाली फसल है खीरा. जुलाई के महीने में खीरे की डिमांड मार्केट में बहुत तेज होती है. 

क्योंकि इस दौरान सलाद और शादियों के सीजन के कारण इसके दाम आसमान छू रहे होते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि खीरे की फसल महज 40 से 50 दिनों में तुड़ाई के लिए बिल्कुल रेडी हो जाती है. अगर आप सही और आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर इस महीने सही बीज लगाते हैं. तो कम लागत में छप्परफाड़ मुनाफा कमाना बिल्कुल तय है. 

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खीरे की ये 3 किस्में देंगी बंपर पैदावार
जुलाई के महीने में अच्छी पैदावार के लिए सबसे जरूरी है सही और उन्नत किस्म के बीजों का सिलेक्शन करना. इस मौसम के लिए एग्रीकल्चर एक्सपर्ट्स 3 सबसे जादुई और बेहतरीन किस्मों को लगाने की सलाह देते हैं. पहली है कल्याणपुर अगेती जो बेहद कम समय में बंपर पैदावार देने के लिए जानी जाती है. दूसरी सबसे पॉपुलर किस्म है पूसा संयोग जिसके फल देखने में बेहद खूबसूरत, सीधे और गहरे हरे रंग के होते हैं. 

जिन्हें मार्केट में देखते ही अच्छे दाम मिल जाते हैं. तीसरी वैरायटी है पंत खीरा-1 जो मानसून के मौसम में लगने वाले आम कीटों और फंगस वाली बीमारियों के प्रति काफी रेजिस्टेंट होती है. इन तीनों ही हाइब्रिड किस्मों की खासियत यह है कि इनके पौधे तेजी से फैलते हैं और इनमें फल भी भारी तादाद में आते हैं. जिससे आपकी प्रति एकड़ पैदावार कई गुना बढ़ जाती है.

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बारिश के मौसम में ऐसे रखें फसलों का ख्याल
जुलाई के महीने में खीरे की सफल खेती करने के लिए कुछ बेहद आसान लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. चूंकि यह बारिश का मौसम होता है इसलिए सबसे पहले अपने खेत में वॉटर ड्रेनेज का पुख्ता इंतजाम करें. क्योंकि खेतों में पानी जमा होने से खीरे की बेलें और जड़ें बहुत जल्दी सड़ जाती हैं. 

इस सीजन में खीरे की बुवाई हमेशा ऊंची मेड़ बनाकर ही करें जिससे पौधे पानी के सीधे संपर्क में आने से बच सकें. इसके साथ ही पौधों को सहारा देने के लिए बांस और रस्सी की मदद से मचान विधि का इस्तेमाल जरूर करें. मचान पर चढ़ने से खीरे जमीन की मिट्टी और पानी से दूर रहते हैं.

 

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लेखक के बारे में

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सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।

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