ककोड़ा की खेती से किसान कमाएंगे तगड़ा मुनाफा
ककोड़ा की खेती : बारिश के मौसम में ककोड़ा की खेती किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला विकल्प बन सकती है. यह फसल 60-70 दिनों में तैयार होती है और बाजार में अच्छे दाम पर बिकती है.
मानसून के वक्त हर किसान की यही शिकायत होती है कि वे जो भी सब्जियां उगाएं उसमें कीड़े लग जाते हैं. ऐसे में किसान को समझ नहीं आता कि वे किस सब्जी की खेती करें. किसानों के लिए एक ऐसी सब्जी की खेती शुरू करनी चाहिए, जो बारिश में आसानी से उगाई जा सके और कम लागत में भी जबरदस्त कमाई करा सके. ऐसे में ककोड़ा की खेती करना किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है. यह एक कांटेदार और गोल-मटोल हरी सब्जी होती है, जो ज्यादातर जंगलों में अपने आप ही उग जाती है. अगर किसान इसे अपने खेत में सही तरीके से उगाएं, तो यह उनकी आमदनी का एक बड़ा जरिया बन सकती है.
ककोड़ा की खासियत यह है कि इसकी बुवाई जून-जुलाई के महीने में की जाती है, जब मानसून की पहली बारिश शुरू होती है. इसकी खेती के लिए 27 से 32 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे सही माना जाता है, यानी गर्म और हल्की नमी वाला मौसम इसके लिए अच्छा माना जाता है. एक खास बात यह भी है कि ककोड़ा का बीज बाजार में नहीं मिलता और कृषि विभाग के पास भी इसके बीज उपलब्ध नहीं होते, इसलिए किसानों को इसके बीज जंगली इलाकों से ही जुटाने पड़ते हैं.
खेत तैयार करने की बात करें तो इसके लिए जैविक पदार्थों से भरी रेतीली मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, जिसका pH 6 से 7 के बीच होना चाहिए. साथ ही ध्यान रखें कि पौधे लगाते समय कतारों के बीच लगभग 2 से 3 मीटर की दूरी और पंक्तियों के बीच 4 मीटर की दूरी रखी जाती है.
सिंचाई की बात करें तो इस काम में किसानों के लिए ज्यादा झंझट नहीं होती है. इसकी खेती के लिए सामान्य रूप से 1500 से 2500 मिलीमीटर बारिश काफी होती है, और बरसात के मौसम में तो इसे ज्यादा पानी देने की जरूरत भी नहीं पड़ती. ध्यान रखने वाली बात है कि रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करनी होती है, उसके बाद बारिश के मौसम में सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही पानी दें, और खेत में पानी जमा होने पर उसे जल्दी निकाल देना चाहिए, क्योंकि ज्यादा पानी भरने से फसल को नुकसान हो सकता है.
अब अगर बात करें इस खेती से कमाई की तो, बरसात के दौरान अगर ये सब्जी बाजार में आते ही ये हाथों-हाथ बिक जाती है, क्योंकि इसकी डिमांड हमेशा से बनी रहती है. यही कारण है कि किसान इससे अच्छा-खासा मुनाफा भी कमाते हैं. जहां बाजार में इसका सामान्य भाव शुरुआत में 90 से 100 रुपये प्रति किलो रहता है, वहीं ये दाम डिमांड बढ़ने पर 150 रुपये प्रति किलो तक भी पहुंच जाता है.
इस फसल की एक और खासियत है कि इस फसल को तैयार होने में ज्यादा समय भी नहीं लगता है, बुवाई के बाद ही करीब 60 से 70 दिनों में ये फसल तैयार हो जाती है. इसके अलावा यह फसल 8 से 10 साल तक पैदावार देती रहती है. यानी किसान को हर साल नई बुवाई करने की जरूरत नहीं होती.
माना जाता है कि ये फसल उगाने में जितनी आसान है उतने ही इसके शारीरिक फायदे भी होते हैं. ककोड़ा का इस्तेमाल केवल सब्जी बनाने के अलावा, अचार बनाने में भी इस्तेमाल होता है. साथ ही इसका उपयोग कफ, खांसी और वात जैसी समस्याओं में भी किया जाता है. इसके अलावा यह मधुमेह के रोगियों के शरीर में शर्करा को नियंत्रित करने में भी मदद करता है. यही वजह है कि इस सब्जी की बाजार में मांग रहती है और अच्छे दाम पर बिकती है.
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लेखक के बारे में
सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।
