कैसे बचाएं केले की फसल को गर्मी की मार से ?

Published By Subhash Pandey
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 केले की खेती: अप्रैल और मई की चिलचिलाती धूप न सिर्फ इंसानों का हाल बेहाल करती है. बल्कि खेतों में खड़ी फसलों की भी जान सुखा देती है. खासकर केले की खेती करने वाले किसानों के लिए यह वक्त किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता. केले के पौधों में पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. इसलिए तेज लू और बढ़ता पारा इनके पत्तों को झुलसा देता है और तनों की नमी सोख लेता है. अगर समय रहते सही उपाय न किए जाएं. 

तो फल छोटे रह जाते हैं और पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है. लेकिन परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कुछ स्मार्ट और आसान तरीकों को अपनाकर आप अपने बाग को इस तपती गर्मी में भी एकदम हरा-भरा रख सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं एक्सपर्ट्स के वो खास तरीके जो आपकी फसल को गर्मी की मार से बचाएंगे और मंडी में आपको फसल का बेहतरीन दाम दिलाएंगे.

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सही समय पर सिंचाई जरूरी
गर्मी के मौसम में केले के बाग में सबसे जरूरी चीज है नमी को बरकरार रखना. जब तापमान 40 डिग्री के पार जाने लगे, तो पौधों को पानी की ज्यादा जरूरत होती है. लेकिन पानी देने का समय बहुत मायने रखता है. तेज धूप में सिंचाई करने से बचें क्योंकि इससे जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. शाम के वक्त या सुबह जल्दी पानी देना सबसे बेस्ट रहता है ताकि रात भर पौधों को ठंडक मिल सके.

केले के बाग में हल्की और बार-बार सिंचाई करना ज्यादा फायदेमंद होता है, जिससे मिट्टी में नमी का स्तर बना रहता है.
अगर आपके पास ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) की सुविधा है. तो यह पानी बचाने और पौधों को हाइड्रेटेड रखने का सबसे स्मार्ट जरिया है.
खेत की मेड़ों पर पानी भरकर रखने से भी आसपास के वातावरण में नमी बनी रहती है और गर्म हवाओं का असर कम हो जाता है.

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लू और गर्म हवाओं से बचाव का इंतजाम
उत्तर भारत में गर्मियों के दौरान चलने वाली लू केले की फसल की सबसे बड़ी दुश्मन है. ये गर्म हवाएं पत्तों को किनारों से सुखा देती हैं, जिससे पौधा अपना भोजन ठीक से नहीं बना पाता. इससे बचाव के लिए खेत के चारों ओर 'विंड ब्रेकर्स' यानी हवा रोकने वाले पेड़ों की कतारें लगाना बहुत फायदेमंद होता है. इसके अलावा, बाग के बीच में हवा के संचार को बनाए रखना भी जरूरी है ताकि उमस से होने वाली बीमारियां न पनपें.

खेत की उत्तर और पश्चिमी दिशा में अरहर या ढैंचा जैसी ऊंची फसलें लगाकर आप गर्म हवाओं के सीधे प्रहार को रोक सकते हैं.
पौधों के बीच की खाली जगह को सूखी घास या मल्चिंग से ढक देने से जमीन का पानी भाप बनकर जल्दी नहीं उड़ता.
फसल को सीधे सूरज की रोशनी से बचाने के लिए पत्तों को आपस में बांधने या सहारा देने का तरीका भी काफी कारगर साबित होता है.

स्प्रे से फसल को रखें एकदम ठंड़ा
गर्मी के तनाव से फसल को उबारने के लिए सही पोषण बहुत जरूरी है. इस मौसम में पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पोटैशियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करना चाहिए. इसके अलावा, धूप से बचाव के लिए कई बार एक्सपर्ट्स पत्तों पर खास तरह के घोल के छिड़काव की सलाह भी देते हैं, जो सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणों के असर को कम कर देते हैं.

दोपहर के समय पौधों पर पानी का हल्का छिड़काव या मिस्टिंग करने से बाग का तापमान 2-3 डिग्री तक कम किया जा सकता है.
ज्यादा खाद देने के बजाय संतुलित मात्रा में तरल उर्वरकों का इस्तेमाल करें ताकि पौधों की जड़ों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े.
सही देखरेख और समय पर किए गए ये छोटे-छोटे बदलाव आपकी फसल की क्वालिटी को खराब होने से बचाते हैं और मुनाफे को पक्का करते हैं.

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लेखक के बारे में

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सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।

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