तितली के पंखों से अपग्रेड होंगे सोलर पैनल्स, दूर होगी बड़ी कमजोरी
नई दिल्ली। सोलर पैनल्स की बड़ी कमजोरी है कि उन पर पड़ने वीली धूप का बड़ा हिस्सा बिजली बनने से पहले ही रिफ्लेक्ट हो जाता है, जिससे काफी ऊर्जा वेस्ट हो जाती है। हालांकि शायद ही किसी ने सोचा हो कि इस गंभीर समस्या का हल प्रकृति ने तितली के पंखों में छिपा रखा है। दरअसल एक नई रिसर्च के मुताबिक तितलियों के पंखों पर मौजूद खास माइक्रोस्कोपिक स्ट्रक्चर की नकल करके सोलर सेल्स को अपग्रेड किया जा सकता है। यह तकनीक धूप के रिफ्लेक्शन को 35% से घटाकर सीधा 5% से भी कम पर ला सकती है। इससे सोलर पैनल्स की क्षमता में बड़ा उछाल आ सकता है।
आपने तितलियों के पंखों पर दिखने वाले रंगों पर गौर किया है? दरअसल ये रंग स्ट्रक्चरल कलर्स की वजह से दिखते हैं। वहीं तितली के काले पंखों की बनावट बिल्कुल अलग होती है। इसके पंखों पर काले स्केल्स मौजूद होते हैं, जो कि न सिर्फ सूरज की रोशनी को अच्छे से सोखते हैं बल्कि खुद में फंसा कर भी रख पाते हैं। इससे रोशनी बाहर नहीं निकल पाती। तितली के पंखों के इस स्ट्रक्चर को रिसर्चर्स ने नेचुरल तकनीक के तौर पर सिलिकॉन पैनल्स पर आजमाने का सोचा है।
तितलियों की 4 प्रजातियों पर रिसर्च
इस नेचुरल तकनीक को सफल बनाने के लिए रिसर्चर्स तितलियों की 4 प्रचातियों के काले स्केल्स जांच रहे हैं। इनमें तिरूमला लिम्नियास, ग्राफियम डोसोन, पैपिलियो प्रोटेनर क्रेमर और ऑर्निथोप्टेरा प्रियामस शामिल हैं।
रिसर्च में पाया गया कि ऑर्निथोप्टेरा प्रियामस के पंखों पर एक बराबर V-आकार के ग्रूव्स यानी कि खांचे बने होते हैं। यह V-आकार की बनावट विजिबल लाइट के रिफ्लेक्शन को घटाकर सिर्फ 1% से 5% तक ले आती है, जो सोलर तकनीक में क्रांति ला सकता है।
तितली के पंखों से सोलर को क्या फायदा?
तितली के पंखों पर बने खास डिजाइन को कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए सिलिकॉन आधारि सोलर पैनल्स पर एंटी-रिफ्लेक्टिल पैटर्न के तौर पर टेस्ट किया जा जा रहा है। इसकी मदद से सिलिकॉन की सतह पर जहां धूप का रिफ्लेक्शन 35% से ज्यादा होता है, वह घटकर 5% से भी कम रह गया।
ऐसे में जब सोलर पैनल पर पड़ने वाली धूप रिफ्लेक्ट नहीं होगी, तो एक तरह से सोलर पैनल को बिजली बनाने के लिए ज्यादा धूप मिल पाएगी और नतीजतन सोलर पैनल की क्षमता काफी बढ़ जाएगी।
कितनी बढ़ेगी सोलर पैनल की क्षमता
रिपोर्ट्स के अनुसार(REF.) कंप्यूटर सिमुलेशन में निकल कर आया है कि तितली से प्रेरित डिजाइन से सोलर पैनल की क्षमता में 66% की बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि, यह डिजाइन की सबसे ज्यादा क्षमता को दिखाता है।
इसके असल परिणामों के बारे में तब पता चलेगा जब इसे कंप्यूटर सिमुलेशन की जगह असल दुनिया में टेस्ट किया जाएगा।
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