सरकार की स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए अलग-अलग मंत्री बनाकर कई लक्ष्यों को साधने की कोशिश
कोलकाता । पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभागों के लिए अलग-अलग मंत्रियों की नियुक्ति की है। इस कदम को शिक्षा व्यवस्था में विशेषज्ञता, बेहतर प्रशासन और निर्णय प्रक्रिया में तेजी लाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दीपक बर्मन को स्कूल शिक्षा मंत्री तथा पत्रकार से राजनेता बने जगन्नाथ चट्टोपाध्याय को उच्च शिक्षा मंत्री का दायित्व सौंपा है।
यह व्यवस्था पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली से अलग है। तृणमूल कांग्रेस के लगभग 15 वर्षों के शासनकाल में शिक्षा विभाग की पूरी जिम्मेदारी एक ही मंत्री के पास रहती थी। इस दौरान शिक्षा विभाग का नेतृत्व मुख्य रूप से ब्रात्य बसु और पार्थ चटर्जी ने संभाला था।
हालांकि, स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए अलग-अलग मंत्रियों की व्यवस्था राज्य के लिए नई नहीं है। वाम मोर्चा सरकार के समय भी यही प्रणाली लागू थी। वर्ष 2011 में वाम शासन के अंतिम कार्यकाल में पार्थ डे स्कूल शिक्षा मंत्री थे, जबकि डॉ. सुदर्शन राय चौधरी उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
सरकार का मानना है कि स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा की प्रकृति तथा आवश्यकताएं अलग-अलग हैं। स्कूल शिक्षा का फोकस बुनियादी शैक्षणिक आधार को मजबूत करने पर होता है, जबकि उच्च शिक्षा शोध, नवाचार और व्यावसायिक कौशल विकास पर केंद्रित रहती है। अलग-अलग मंत्री होने से दोनों क्षेत्रों पर अधिक केंद्रित तरीके से काम किया जा सकेगा।
दोनों विभागों की जरूरतें और चुनौतियां भिन्न होने के कारण अलग रणनीति और संसाधन आवंटन की आवश्यकता होती है। सरकार का मानना है कि पृथक नेतृत्व से बजट के प्रभावी उपयोग और शैक्षणिक ढांचे के विकास की निगरानी अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सकेगी।
स्कूल और उच्च शिक्षा से जुड़ी समस्याएं तथा अपेक्षाएं अलग होती हैं। ऐसे में दोनों विभागों के मंत्री अपने-अपने क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप नीतियां तैयार कर सकेंगे और उन्हें अधिक प्रभावी ढंग से लागू कर पाएंगे।
शिक्षा विभाग के दोनों हिस्सों की जटिलताओं को एक ही मंत्री द्वारा संभालना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। अलग-अलग मंत्रियों की नियुक्ति से फाइलों के निपटारे, मंजूरी प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों में तेजी आने की उम्मीद है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षा विभाग का यह पुनर्गठन राज्य की शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने, प्रशासनिक दक्षता सुधारने और शिक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक सुधारों को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
लेखक के बारे में
सुधा जायसवाल ने मास कम्युनिकेशन एवं पत्रकारिता (MJMC) में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है और पत्रकारिता क्षेत्र में 12 वर्षों से सक्रिय हैं। वह अमर उजाला, स्वतंत्र भारत, जनसंदेश टाइम्स और तरुण मित्र जैसे संस्थानों में कार्य कर चुकी हैं। राजनीतिक, शिक्षा और नगर निगम सहित विभिन्न बीट्स पर रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाली सुधा वर्तमान में तरुण मित्र के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं।
