पूर्व मंत्री सुजीत बोस की हिरासत मांग रही ईडी, बैंकशाल अदालत में पेशी

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कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए अदालत में आवेदन दायर किया है। एजेंसी ने बैंकशाल अदालत से 10 दिनों की ईडी हिरासत की मांग की है।

ईडी के वकील ने अदालत में दावा किया कि महामारी के दौरान सुजीत बोस से जुड़ा रेस्तरां बंद रहने के बावजूद करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ। एजेंसी का आरोप है कि वह प्रभावशाली व्यक्ति रहे हैं और रिहा होने पर जांच को प्रभावित कर सकते हैं। ईडी ने यह भी कहा कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया और पूछताछ के दौरान सभी सवालों के सही जवाब नहीं दिए।

एजेंसी के अनुसार, शुरुआत में सुजीत बोस समन के बावजूद उपस्थित नहीं हुए थे और बाद में उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया था। ईडी का दावा है कि यदि उन्हें फिलहाल रिहा किया गया तो वह अन्य आरोपितों को सतर्क कर सकते हैं तथा साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं।

वहीं, सुजीत बोस के वकील ने अदालत में गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022-23 के दस्तावेजों के आधार पर अब गिरफ्तारी क्यों की गई। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दाखिल आरोपपत्र में सुजीत बोस का नाम नहीं है।

ईडी ने अदालत को बताया कि भर्ती घोटाले में गिरफ्तार कारोबारी अयन शील से मिले डिजिटल साक्ष्यों में यह सामने आया है कि सुजीत बोस ने दक्षिण दमदम नगर पालिका में कई नौकरी अभ्यर्थियों के नाम की सिफारिश की थी। जांच में निताई दत्ता का नाम भी सामने आने का दावा किया गया है।

ईडी सूत्रों के अनुसार, दक्षिण दमदम नगर पालिका में अवैध नियुक्तियों के मामले में करीब 150 अभ्यर्थियों के नामों की सिफारिश किए जाने की जानकारी मिली है। एजेंसी का आरोप है कि इन सिफारिशों के बदले अनुचित लाभ लिया गया और भ्रष्टाचार से अर्जित धन विभिन्न बैंक खातों में जमा किया गया। इसी सिलसिले में कई बैंक खातों की जांच की जा रही है।

सोमवार रात गिरफ्तारी के बाद मंगलवार सुबह सुजीत बोस का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। उन्हें सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित ईडी कार्यालय से लेकर बिधाननगर अस्पताल ले जाया गया, जहां स्वास्थ्य जांच के बाद बैंकशाल अदालत में पेश किया गया।

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