मदरसा जामे उल उलूम फुरकानिया में "इस्लाम,तानाशाही और पिछड़ापन" विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन
मुजाहिद खां
रामपुर:बुधवार को मदरसा जामे उल उलूम फुरकानिया में "इस्लाम,तानाशाही और पिछड़ापन" विषय पर एक शैक्षिक एवं वैचारिक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया,जिसमें उलेमा,बुद्धिजीवियों,छात्रों तथा शिक्षाप्रेमियों की बड़ी संख्या ने भाग लिया। इस अवसर पर विशेष रूप से सैयद शुएब मियां (सदर जामा मस्जिद),शुएब रज़ा ख़ां वारसी,ताहिर रज़ा ख़ां वारसी,अहमद मियां,डॉ. नूर मोहम्मद,मुकर्रम रज़ा ख़ां इनायती तथा एडवोकेट शारिक़ुल्लाह ख़ां वजीही सहित संस्था के सभी शिक्षक एवं प्रबंधकगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ कारी फरहत सुल्तान ख़ां की प्रभावशाली कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुआ।इसके पश्चात प्रसिद्ध नातख़्वाँ अज़हर इनायती तथा जनाब जावेद नसीमी ने बारगाह-ए-रिसालत मआब स0अलै0 में नातिया कलाम प्रस्तुत कर उपस्थित जनों के दिलों को इश्क़-ए-रसूल स0 अलै0 की भावना से सराबोर कर दिया।
विचार गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. शुआइरुल्लाह ख़ां वजीही,अध्यक्ष,मदरसा जामे उल उलूम फुरकानिया ने की।उन्होंने मदरसा एवं खानकाह का परिचय कराते हुए उलमा-ए-फुरकानिया की धार्मिक,शैक्षिक एवं सामाजिक सेवाओं से उपस्थित लोगों को अवगत कराया।डॉ. हफ़ीज़ुर्रहमान,संयोजक,ख़ुसरो फ़ाउंडेशन ने प्रारंभिक वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए पुस्तक के विषय,लेखक के विद्वतापूर्ण स्थान तथा वर्तमान युग में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।साथ ही उन्होंने ख़ुसरो फ़ाउंडेशन की उपयोगिता और उसकी गतिविधियों से भी श्रोताओं को अवगत कराया।
इस अवसर पर मौलाना एहतिसामुल्लाह ख़ां वजीही,इमाम जामा मस्जिद ने "इस्लाम,तानाशाही और पिछड़ापन" विषय पर कुरआन मजीद और हदीस-ए-नबवी स0अलै0 की रोशनी में अत्यंत तर्कपूर्ण,व्यापक और विचारोत्तेजक व्याख्यान दिया।उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम न्याय,परामर्श (शूरा),समानता और मानवीय गरिमा का समर्थक है तथा मुस्लिम समाजों की उन्नति और विकास का रहस्य इस्लामी शिक्षाओं के पालन में निहित है।उन्होंने कुरआन और सुन्नत के अनेक संदर्भों के माध्यम से यह भी बताया कि जब समाज ज्ञान,न्याय,ईमानदारी और परामर्श के सिद्धांतों से दूर हो जाते हैं,तो पतन,पिछड़ापन और अव्यवस्था उनका भाग्य बन जाते हैं।
वक्ताओं ने विषय के विभिन्न ऐतिहासिक,वैचारिक और सामाजिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए शोध,संवाद और सकारात्मक बौद्धिक विमर्श की आवश्यकता पर बल दिया।अन्य उपस्थित लोगों ने भी विषय से संबंधित अपने विचार व्यक्त किए तथा पुस्तक के विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के समापन पर छात्रों में ख़ुसरो फ़ाउंडेशन द्वारा प्रकाशित उपयोगी पुस्तकें वितरित की गईं।अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. शुआइरुल्लाह ख़ां वजीही ने पुस्तक अध्ययन,बौद्धिक गोष्ठियों और वैचारिक बैठकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को ज्ञान और शोध से जुड़े रहने की प्रेरणा दी।उन्होंने इस प्रकार के कार्यक्रमों की निरंतरता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस विचार गोष्ठी को अत्यंत उपयोगी,ज्ञानवर्धक और समय की आवश्यकता बताते हुए आयोजकों का धन्यवाद किया तथा भविष्य में भी ऐसे शैक्षिक एवं वैचारिक कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।
अंत में मौलवी मोहम्मद नासिर ख़ां ने देश एवं समाज की शांति,मुस्लिम उम्मत की एकता,प्रगति और कल्याण के लिए भावपूर्ण दुआ कराई।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
