हापुड़- अमरोहा में निजीकरण व उत्पीड़न के खिलाफ जन-जागरण तेज

अन्य जनपदों में भी आंदोलन जारी रहेगा

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लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर संचालित प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज हापुड़ एवं अमरोहा में प्रभावी विरोध सभाएं आयोजित की गईं। इस अभियान का उद्देश्य बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं एवं संविदा कर्मियों पर हो रहे उत्पीड़न, बिजली क्षेत्र में तेजी से बढ़ते निजीकरण तथा तानाशाहीपूर्ण नीतियों के विरुद्ध व्यापक जनसमर्थन तैयार करना है।

हापुड़ एवं अमरोहा की सभाओं को संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों  जितेन्द्र सिंह गुर्जर,  महेन्द्र राय,  मोहम्मद वसीम एवं  निखिल कुमार ने मुख्यतया संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण, ओबरा एवं अनपरा विद्युत परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया, गंगा कैनाल स्थित जल विद्युत परियोजनाओं को लीज पर देने तथा ट्रांसमिशन क्षेत्र में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग के जरिए निजीकरण के प्रयास न तो बिजली व्यवस्था के हित में हैं और न ही उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।

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वक्ताओं ने ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनियों के कार्यों तथा आगरा में टोरेंट पावर की फ्रेंचाइजी के खिलाफ उपभोक्ताओं से लगातार मिल रही शिकायतों और करार उल्लंघनों का उल्लेख करते हुए संबंधित कंपनियों की जवाबदेही तय करने एवं प्रभावी कार्रवाई की मांग की।

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संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि 03 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री एवं शासन के साथ हुए लिखित समझौते का आज तक पालन नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। मार्च 2023 के आंदोलन एवं सांकेतिक हड़ताल के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई दमनात्मक कार्रवाइयों—जिनमें एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानांतरण एवं अनुशासनात्मक कार्यवाहियां शामिल हैं—को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। साथ ही 19 मार्च 2023 को दिए गए निर्देशों के अनुरूप सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए।

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प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि डाउनसाइजिंग एवं वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः बहाल किया जाए तथा आउटसोर्स कर्मियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम में समाहित किया जाए। निलंबित कर्मचारियों की सम्मानजनक बहाली, दूरस्थ स्थानांतरणों की वापसी एवं लंबित अनुशासनात्मक कार्यवाहियों को समाप्त करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

संघर्ष समिति ने मई 2025 में सेवा नियमों में किए गए तानाशाहीपूर्ण संशोधनों का विरोध करते हुए कहा कि बिना जांच, बिना सुनवाई और बिना स्पष्टीकरण का अवसर दिए सेवा से बर्खास्त करने जैसे प्रावधान अस्वीकार्य हैं। साथ ही फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में भाग लेने पर बड़े पैमाने पर स्थानांतरण, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा बिजली कर्मियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने जैसी कार्यवाहियों को तत्काल बंद करने की मांग की गई। ट्रांसफार्मर क्षति की स्थिति में अभियंताओं एवं जूनियर इंजीनियरों से की जा रही अवैधानिक वसूली को भी तुरंत निरस्त करने की मांग की गई।

संघर्ष समिति ने प्रदेश की जनता, किसानों एवं उपभोक्ताओं से अपील की कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि सस्ती, सुलभ और विश्वसनीय बिजली व्यवस्था को बचाने का साझा संघर्ष है। निजीकरण से जहां उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, वहीं सेवाओं की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। अतः सभी नागरिकों से इस जन-जागरण अभियान में सक्रिय सहयोग करने का आह्वान किया गया।

संघर्ष समिति ने संकल्प व्यक्त किया कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, आंदोलन के दौरान भी उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करेंगे तथा उत्पीड़न और निजीकरण के विरुद्ध अपना संघर्ष जारी रखेंगे।

लेखक के बारे में

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हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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