यूपी कारागार एवं यूपीएसईएफएस के बीच एमओयू, वैज्ञानिक प्रशिक्षण को मिलेगा बढ़ावा
फॉरेंसिक विज्ञान से सशक्त होगा कारागार तंत्र
लखनऊ। बुधवार कारागार मुख्यालय में कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं व उत्तर प्रदेश राज्य फोरेंसिक विज्ञान संस्थान के बीच शैक्षणिक, अनुसंधान एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू (महत्वपूर्ण समझौता) हुआ।
यूपीएसईएफएस के निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली वर्तमान समय में एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। एक ओर कारागारों को केवल दंड देने वाले संस्थान के बजाय सुधार गृह के रूप में स्थापित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों ने न्याय व्यवस्था की सोच को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अब हमारी व्यवस्था "दंड से न्याय" की दिशा में अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक साक्ष्यों के माध्यम से निर्दोष व्यक्तियों को गलत दोषसिद्धि से बचाने तथा दोषियों के विरुद्ध प्रभावी दोषसिद्धि सुनिश्चित करने में फॉरेंसिक की निर्णायक भूमिका है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार फॉरेंसिक क्षमताओं के निरंतर विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश राज्य फोरेंसिक विज्ञान संस्थान की स्थापना की गई। उन्होंने संस्थान की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर सुरक्षा एवं साइबर अपराध जांच की बढ़ती आवश्यकता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. गोस्वामी ने कहा कि यह एमओयू दोनों संस्थानों के बीच प्रशिक्षण, अनुसंधान, अध्ययन, कार्यशालाओं, विशेषज्ञ व्याख्यान, इंटर्नशिप, पाठ्यक्रम विकास एवं संयुक्त शोध को बढ़ावा देगा। विभाग की आधुनिक प्रयोगशालाओं एवं विशेषज्ञता का लाभ कारागार विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मिलेगा, जिससे उनकी व्यावसायिक क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं साक्ष्य-आधारित कार्य संस्कृति को सुदृढ़ किया जा सकेगा। वहीं डीजी, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं,पी.सी. मीना ने कहा कि यह एमओयू दोनों संस्थानों के लिए एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।
इससे कारागार प्रशासन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान आधारित निर्णय प्रक्रिया तथा आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि यूपीएसईएफएस के साथ यह सहयोग कारागार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कौशल विकास, नवाचार, क्षमता निर्माण तथा अनुसंधान को नई गति देगा और अंततः राज्य की न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाने में सहायक होगा।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
