संसार के कीचड़ से निकलना है तो गुरु के सानिध्य में जाओ ---पूज्य गुरुवर
फिरोजाबाद, सुहागनगरी के प्रतिष्ठित छदामी लाल जैन मन्दिर में आयोजित धर्म सभा मे आचार्य निर्भय सागर ने कहा जिंदगी में तीन मोड़ आते हैं बाल्यावस्था युवावस्था वृद्धावस्था जो यह सोचते हैं कि मरने के बाद किसका क्या होगा वह पीछे ही रह जाते हैं और जो यह सोचते हैं कि समय पर मेरी इस आत्मा का क्या होगा है वह अपने जीवन को सार्थक कर लेते हैं
वृद्धो में शक्ति कम है, लेकिन आत्म शक्ति उतनी ही है। जितनी एक युवा में उसे शक्ति को उद्घाटित करके संसार के कीचड़ से निकलना है। गुरु के सानिध्य में अगर आ गये तो कल्याण हो जाएगा। जिस प्रकार एक मिट्टी पानी की संगति में आकर कीचड़ बन जाती है। खेत में गन्ना की संगति में आकर मीठी हो जाती है। और वही मिट्टी कुम्हार की संगति में आने पर मूर्ति बन जाती है। इस प्रकार आत्मा दुर्जनों की संगति में आकर दुर्जन हो जाती है। और सज्जनों की संगति में आकर के सज्जन बन जाती है। परमात्मा की संगति में आकर परमात्मा बन जाती है। आचार्य जी ने कहा निज घर की बात को पर घर में प्रचार नहीं करना चाहिए, परिवार समाज और धर्म की बात को कभी कटघरे में नहीं ले जाना चाहिए यह सबसे बड़ा एक अपराध है। यह बात आचार्य श्री ने छदामी लाल जैन मंदिर की धर्म सभा में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के मध्य कहीं।
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लेखक के बारे में
रविंद्र वर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के फिरोज़ाबाद ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ के साथ वह समाचार कवरेज और रिपोर्टिंग का कार्य कर रहे हैं।
