गजनवी ने सोमनाथ मंदिर तो चंदाचोर पार्टी ने राम मंदिर लूटा: संजय सिंह
कहा योगी सरकार की एसआईटी कर रही लीपापोती
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच, कहा अयोध्या में चंदाचोरी के आरोपियों का सामाजिक बहिष्कार शुरू
- अधिवक्ता संघ ने तीन दिन में अयोध्या छोड़ने का दिया अल्टीमेटम
लखनऊ। मंगलवार आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक बयान में राम मंदिर चंदा चोरी और कथित भ्रष्टाचार के मामले में भारतीय जनता पार्टी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था, विश्वास और श्रद्धा के साथ किया गया सबसे बड़ा विश्वासघात है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभु श्रीराम के नाम पर देशभर से हजारों करोड़ रुपये का चंदा जुटाकर चंदा चोर पार्टी ने जनता की धार्मिक भावनाओं का शोषण किया और अब योगी सरकार की एसआईटी पूरे मामले पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई अथवा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए। संजय सिंह ने कहा कि अब इस मामले में केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि अयोध्या का समाज भी खुलकर सामने आ गया है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या अधिवक्ता संघ ने घोषणा की है कि चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा सहित चंदा चोरी के आरोपों से जुड़े लोगों का कोई अधिवक्ता मुकदमा नहीं लड़ेगा। अधिवक्ता संघ ने तीन दिन के भीतर उन्हें अयोध्या से बाहर करने का अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि ऐसा नहीं होने पर पूरे अयोध्या में जाम और व्यापक आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि रामनगरी अब ऐसे लोगों को स्वीकार करने को तैयार नहीं है और उनका सामाजिक बहिष्कार शुरू हो चुका है।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संरक्षण में बनी व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब ट्रस्ट के प्रमुख पदों पर नियुक्तियां प्रधानमंत्री कार्यालय की सहमति से हुईं, तब मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा गठित एसआईटी उस पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा कि यही कारण है कि पूरे मामले में कार्रवाई के बजाय केवल लीपा-पोती और दोषियों को बचाने का प्रयास दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में उन्होंने स्वयं अयोध्या कोतवाली में लिखित शिकायत देकर कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। हाल ही में उन्होंने एसआईटी को 13 विवादित भूमि सौदों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे हैं, लेकिन आज तक उन मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ होती तो वर्षों पहले ही दोषियों को जेल भेजा जा चुका होता। संजय सिंह ने कहा कि यदि पिछले पाँच-छह वर्षों से भ्रष्टाचार चल रहा था तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उस दौरान कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री लगातार अयोध्या जाते रहे, शिकायतें भी होती रहीं, फिर भी सरकार मौन रही। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार को पहले से सब कुछ पता था और क्या भ्रष्टाचार की रकम सत्ता के शीर्ष तक पहुँचने के कारण कार्रवाई नहीं की गई? उन्होंने कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों को बड़ी कार्रवाई बताकर सरकार जनता की आँखों में धूल झोंक रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर गंभीर आरोप हैं, उनमें से गोपाल राव समेत कई अब भी प्रभावशाली भूमिकाओं में बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ इस्तीफे देकर पूरे भ्रष्टाचार पर पर्दा नहीं डाला जा सकता।
संजय सिंह ने कहा, "इतिहास में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को लूटा था, लेकिन आज चंदा चोर पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने प्रभु श्रीराम के मंदिर को लूटने का काम किया है। इस लूट में नीचे से लेकर ऊपर तक पूरी व्यवस्था शामिल है। प्रभु श्रीराम के नाम पर श्रद्धालुओं से हजारों करोड़ रुपये का चंदा लिया गया और उसी धन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।"
संजय सिंह ने कहा कि नृपेंद्र मिश्रा किसका आदमी है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का, चंपत राय किसका आदमी है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा नियुक्त किया गया, भाजपा द्वारा नियुक्त किया गया। उन्होंने कहा कि प्रतापगढ़ के एक बुजुर्ग ने अपनी जमीन बेचकर प्रभु श्रीराम के मंदिर के लिए एक करोड़ रुपये का दान दिया था। ऐसे लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा और विश्वास से दान दिया, लेकिन चंदा चोर पार्टी ने उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचाने और उनकी आस्था का राजनीतिक तथा आर्थिक शोषण करने का काम किया।
संजय सिंह ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि जिन लोगों ने प्रभु श्रीराम के नाम पर करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया, उनका लोकतांत्रिक और सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था, विश्वास और सम्मान की रक्षा की लड़ाई है तथा दोषियों को किसी भी कीमत पर कानून और जनता की अदालत से बचने नहीं दिया जाएगा।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
