तालाब का अस्तित्व खत्म होने से थमी जल निकासी, जलभराव से मोहल्ला बना तालाब
संक्रामक बीमारियों के साये में जीने को मजबूर सैकड़ों परिवार
- बिजनौर सरवन नगर गांव में जल भराव से ग्रामीणों में आक्रोश स्थानीय पार्षद, नगर निगम की टीम बेखबर
लखनऊ। राजधानी के सरोजनी नगर (बिजनौर रोड) स्थित सरवन नगर गाँव में मानसून की शुरुआती बारिश ने ही नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के दावों की पोल खोल कर रख दी है। गाँव में जल निकासी की कोई उचित व्यवस्था न होने के चलते मुख्य रास्तों और गलियों में अत्यधिक जलभराव हो गया है, जिससे पूरा मोहल्ला तालाब में तब्दील हो चुका है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि ग्रामीण अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
घुटनों तक भरा पानी, घरों से निकलना हुआ दूभर
सरवन नगर गाँव के अंदर की गलियों में इस समय घुटनों तक गंदा और बदबूदार पानी भरा हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस भीषण जलभराव के कारण उनका अपने घरों से बाहर निकलना पूरी तरह से दूभर हो गया है। बच्चों की पढ़ाई ठप है और बुजुर्गों व मरीजों के लिए संकट खड़ा हो गया है। अगर किसी को मजबूरी में बाहर निकलना भी पड़ रहा है, तो उन्हें इसी गंदे, संक्रामक पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे आए दिन हादसों का अंदेशा बरकरार रहता है।
ये खबर भी पढ़े : राम मंदिर के सभी प्रमुख निर्माण कार्य 30 जुलाई तक पूरे होने का लक्ष्य : नृपेंद्र मिश्रातालाब का अस्तित्व खत्म होना बनी तबाही की वजह
ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या की मुख्य वजह बताते हुए कहा कि गाँव के बाहर जो पारंपरिक तालाब था, वह अब पूरी तरह से पट चुका है (अस्तित्व खत्म हो चुका है)। तालाब के पटने के कारण गाँव के पानी की निकासी का जरिया पूरी तरह ब्लॉक हो गया है। यही कारण है कि हर साल बरसात के दिनों में यहाँ यही नारकीय समस्या उत्पन्न हो जाती है, लेकिन प्रशासन ने कभी भी तालाब के पुनरुद्धार या वैकल्पिक ड्रेनेज सिस्टम पर काम नहीं किया।
वर्तमान भाजपा पार्षद रिंकी रावत और नगर निगम प्रशासन बेखबर
स्थानीय जनता का आरोप है कि वर्तमान भाजपा पार्षद रिंकी रावत कभी-कभार ट्यूबवेल से पाइप लगवाकर पानी को बाहर जरूर निकलवाती हैं, लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। इन दिनों समस्या लगातार विकराल बनी हुई है, मगर न तो पार्षद रिंकी रावत ग्रामीणों की सुध ले रही हैं और न ही नगर निगम प्रशासन इस तरफ ध्यान दे रहा है। शासन-प्रशासन की इस घोर अनदेखी को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है।
संक्रामक बीमारियों का मंडराया खतरा, आंदोलन की चेतावनी अंदर की गलियों में कई दिनों से जमा इस गंदे पानी के कारण पूरे गाँव में भीषण बदबू फैल रही है। रुके हुए पानी में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे इलाके में डेंगू, मलेरिया, डायरिया जैसे संक्रामक बीमारियों के फैलने का बड़ा खतरा पैदा हो गया।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
