मुजफ्फरनगर में बंधुआ मजदूरी का खुलासा, फैक्ट्री से 12 श्रमिक मुक्त, 2 आरोपी गिरफ्तार
तितावी पुलिस और एसओजी देहात की संयुक्त कार्रवाई में बिहार, यूपी समेत कई राज्यों के श्रमिकों को कराया गया मुक्त
वेतन के नाम पर लाकर 24 घंटे कराया जाता था जबरन काम
मुजफ्फरनगर । मुजफ्फरनगर में पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के नेतृत्व में तितावी पुलिस और एसओजी देहात की संयुक्त टीम ने बंधुआ मजदूरी के एक गंभीर मामले का खुलासा करते हुए फैक्ट्री से 12 श्रमिकों को मुक्त कराया और 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई 22 जून 2026 को तब शुरू हुई जब थाना तितावी पुलिस को सूचना मिली कि ग्राम मांडी स्थित एक फैक्ट्री में कुछ श्रमिकों को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है और उनसे जबरन काम कराया जा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया और तत्काल संयुक्त टीम का गठन किया गया।
इस ऑपरेशन का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक ने किया, जबकि क्षेत्राधिकारी फुगाना विश्वजीत सिंह के पर्यवेक्षण में थाना तितावी पुलिस, एसओजी देहात, सहायक श्रम आयुक्त और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापेमारी की।
ये खबर भी पढ़े : लखनऊ अग्निकांड के बाद डीएम एवं एसपी ने विभिन्न लाइब्रेरी एवं कोचिंग संस्थानों का किया औचक निरीक्षणछापेमारी के दौरान फैक्ट्री परिसर से 12 श्रमिकों को सुरक्षित मुक्त कराया गया। ये श्रमिक बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और राजस्थान सहित कई राज्यों से थे। जांच में यह भी सामने आया कि इनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थे। श्रमिकों को करीब एक से डेढ़ वर्ष से फैक्ट्री में बंधक बनाकर रखा गया था।पुलिस ने मौके से दो आरोपियों—शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान—को गिरफ्तार किया, जबकि एक अन्य आरोपी अंकित बालियान फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
पीड़ित श्रमिकों ने बताया कि उन्हें 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन, भोजन और रहने की सुविधा का झांसा देकर यहां लाया गया था, लेकिन बाद में उन्हें कोई वेतन नहीं दिया गया। उनसे दिन-रात काम कराया जाता था और केवल एक बार सूखी रोटी दी जाती थी। फैक्ट्री से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। वेतन मांगने या विरोध करने पर मारपीट की जाती थी और उन्हें रॉड व डंडों से पीटा जाता था।
वहीं, गिरफ्तार आरोपी शिवा त्यागी ने पूछताछ में बताया कि वे रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों से मजदूरों को बहला-फुसलाकर फैक्ट्री लाते थे। उन्हें झूठे वादे किए जाते थे और बाद में बंधक बनाकर जबरन काम कराया जाता था। इस मामले में थाना तितावी में भारतीय न्याय संहिता, बाल श्रम कानून और बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।इस सफल कार्रवाई पर पुलिस टीम को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा 25,000 रुपये का पुरस्कार भी दिया गया है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
