अलीगढ़ की धातु मूर्तियों को मिला GI टैग, यूपी ने 83 टैग के साथ देश में पहला स्थान बरकरार रखा
अलीगढ़ | अलीगढ़ की विश्व प्रसिद्ध धातु मूर्तियों और आर्टवेयर को आधिकारिक तौर पर Geographical Indication (GI) टैग मिल गया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने देश में अपनी अग्रणी स्थिति को और मजबूत करते हुए कुल 83 जीआई टैग हासिल कर पहला स्थान बनाए रखा है।यह मान्यता अलीगढ़ की पारंपरिक पीतल और धातु शिल्पकला के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिससे स्थानीय कारीगरों और निर्यातकों में उत्साह का माहौल है।
लंबे प्रयासों के बाद मिली पहचान
अलीगढ़ ब्रास स्टेचू एंड आर्टवेयर सप्लायर एसोसिएशन के अध्यक्ष हनुमंत राम गांधी ने बताया कि इस जीआई टैग के लिए आवेदन पद्मश्री डॉ. रजनी कांत के सहयोग से किया गया था, जिन्हें जीआई मैन ऑफ इंडिया के रूप में भी जाना जाता है।चेन्नई स्थित GI रजिस्ट्री में कई तकनीकी परीक्षणों, दस्तावेजी प्रक्रियाओं और मूल्यांकन के बाद अलीगढ़ की धातु कला को यह आधिकारिक पहचान दी गई।
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अलीगढ़ में बनी पीतल और धातु की मूर्तियां अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया तक निर्यात की जाती हैं। भारतीय संस्कृति, देवी-देवताओं और पारंपरिक कलाकृतियों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती मांग के कारण इस उद्योग का विदेशी मुद्रा अर्जन में महत्वपूर्ण योगदान है।अब GI टैग मिलने के बाद इन उत्पादों की प्रामाणिकता और ब्रांड वैल्यू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। इससे न केवल नकली उत्पादों पर रोक लगेगी, बल्कि कारीगरों और व्यापारियों को बेहतर कीमत भी मिल सकेगी।
कारीगरों के लिए बड़ी राहत
स्थानीय एसोसिएशन के सचिव कपिल वार्ष्णेय और कोषाध्यक्ष मोहित राठी ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व का परिणाम बताया।उन्होंने कहा कि यह मान्यता अलीगढ़ के पारंपरिक कारीगरों के लिए एक बड़ा सम्मान है और इससे क्षेत्र में रोजगार और उत्पादन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
देशभर में GI टैग का विस्तार
विशेषज्ञों के अनुसार इस वित्तीय वर्ष में GI टैग देने की प्रक्रिया में तेजी आई है। लद्दाख में 8, झारखंड में 8, मध्य प्रदेश में 22 और अन्य राज्यों जैसे बिहार, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और असम में भी कई उत्पादों को मान्यता मिली है।अब तक कुल 84 नए GI पंजीकरण विभिन्न राज्यों में दर्ज किए गए हैं, जबकि 215 से अधिक आवेदन अभी विभिन्न चरणों में लंबित हैं।अलीगढ़ की यह उपलब्धि भारतीय हस्तशिल्प उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो वैश्विक स्तर पर इसकी पहचान और मजबूती को और आगे बढ़ाएगी।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
