मंदिर के पहले शराब का ठेका क्यों? सावन में कांवड़ यात्रा का समापन शिव मंदिर में
बगल में बेखौफ चलता शराब का ठेका—शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं!
महोबा। आज एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो धार्मिक आस्था और सरकारी व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। महोबा मुख्यालय में सुभाष चौकी के पास संचालित शराब के ठेके को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद अब तक आबकारी विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई न होने का आरोप है। बताया जा रहा है कि ठेके के ठीक बगल में भगवान शिव का अति प्राचीन मंदिर स्थित है। सावन के पवित्र महीने में हर वर्ष रामकुंड से कांवड़ यात्रा निकलती है और श्रद्धालु इसी शिव मंदिर में पहुंचकर अपनी कांवड़ यात्रा का समापन करते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्थान पर सावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, उसी के ठीक बगल में शराब की दुकान का संचालन आखिर कैसे जारी है? स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में शिकायत पोर्टल पर कई बार शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि शिकायतें आखिर किसके लिए की जा रही हैं और जिम्मेदार विभाग उन पर क्या कार्रवाई कर रहा है?
जब मंदिर और ठेका आमने-सामने हों तो प्राथमिकता किसकी?
विडंबना देखिए—इस खबर में मंदिर का उल्लेख करने से पहले शराब के ठेके को दिखाना पड़ रहा है। क्या व्यवस्था की यही तस्वीर है कि धार्मिक स्थल पीछे और शराब का ठेका आगे नजर आए? स्थानीय लोगों की मांग है कि आबकारी विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर स्थल का भौतिक सत्यापन कराए और यदि ठेका निर्धारित नियमों या दूरी संबंधी प्रावधानों का उल्लंघन कर संचालित हो रहा है तो तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अब सवाल सिर्फ एक ठेके का नहीं, बल्कि जिम्मेदार विभाग की जवाबदेही का है। शिकायतें होने के बावजूद अगर कार्रवाई नहीं होती, तो फिर जनता आखिर अपनी शिकायत लेकर जाए कहां?
आस्था के केंद्र के बगल में शराब की दुकान—क्या यही है जिम्मेदार व्यवस्था की तस्वीर?
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लेखक के बारे में
नितिन नामदेव को पत्रकारिता क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है और वह उत्तर प्रदेश के महोबा क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। समाचार लेखन और रिपोर्टिंग में सक्रिय रहते हुए उन्होंने क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में कार्यरत हैं।
