700 साल पुरानी जामा मस्जिद में हिंदू देवी-देवताओं और जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां
भरुच: गुजरात के भरुच की लगभग 700 साल पुरानी जामा मस्जिद विवादों में है। इस ऐतिहासिक स्थल की जमीन और मूल स्वरूप को लेकर अलग-अलग तरह के दावे सामने आने के बाद यह मामला धार्मिक-ऐतिहासिक बहस में तब्दील हो गया है। दरअसल, हाल में सामने आए एक वीडियो के बाद जामा मस्जिद का विवाद और गहरा गया है, जिसमें मस्जिद के तहखाने में जैन तीर्थंकरों और हिंदू देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां व नक्काशीदार पत्थर दिखने का दावा किया गया है। इस दावे के बाद प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।
तहखाने में मूर्तियों का दावा
हाल ही में जामा मस्जिद के अंडरग्राउंड हिस्से का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं और भगवान मल्लिनाथ सहित जैन तीर्थंकरों की प्राचीन मूर्तियां और नक्काशीदार पत्थर दिखाई देने का दावा किया गया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद जामा मस्जिद के मूल स्वरूप को लेकर बहस तेज हो गई है और अलग-अलग तरह के दावे किए जा रहे हैं।
जैन और हिंदू पक्ष का दावा
हिंदू और जैन संत समुदायों का दावा है कि यह स्थल मूल रूप से 'समी विहार' या प्राचीन मंदिर था, जिसे तोड़कर मुगल काल में जामा मस्जिद का निर्माण किया गया। वे पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने की मांग कर रहे हैं। हिंदू और जैन पक्ष की मांग है कि जामा मस्जिद के मूल स्वरूप की जांच होनी चाहिए। वे इसके प्राचीन मंदिर को तोड़कर बनाई गई मस्जिद होने का दावा कर रहे हैं।
मुस्लिम पक्ष का रुख
जामा मस्जिद ट्रस्ट और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने इन दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि इस स्थान के उनके पास ऐतिहासिक और धार्मिक प्रमाण हैं जो इसे मस्जिद साबित करते हैं। मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाए जाने का दावा गलत है।
अभी ASI के संरक्षण में है जामा मस्जिद
वर्तमान में भरुच की जामा मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के संरक्षण में है। इस विवाद के बाद से ASI और स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर हैं और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जामा मस्जिद के आसपास आने-जाने वालों पर नजर रखी जा रही है। यहां सुरक्षाकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
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लेखक के बारे में
सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।
