कटिहार में वीबी - जी राम जी योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा
भ्रष्टाचारियों की भेंट चढ़ रहा वीबी - जी राम जी योजना, "नाम बदला पर व्यवस्था नहीं"
तरुणमित्र कटिहार। केंद्र सरकार भले ही वीबी - जी राम जी योजना को एआई और तकनीक से लैस, पूरी तरह पारदर्शी बताती हो, लेकिन कटिहार जिले में इसका सच कुछ और ही है। यहां भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि सारी निगरानी व्यवस्था फेल हो रही है। जिले के बरसोई प्रखंड के कदमगाछी, बेलवाडागी, चापाखोर पंचायत जहाँ इतनी बारिस होने के बाद भी खेत पोखरी व सरकारी तालाब मे मजदूरों का फर्जी हाजरी बनाया गया है।
कदवा प्रखंड के परभेली, गोपीनगर और चनधर पंचायतों में एनएमएमएस पोर्टल पर रोजाना मजदूरों की हाजिरी दर्ज हो रही है, लेकिन योजना स्थल पर काम बिल्कुल नहीं हो रहा। जबकि, धरातल पर ना तो कार्य मिले ना ही मजदूर मिले कई स्थल ऐसे मिले जिनमे पूर्व से कलभट बना हुआ था जो पुरे व्यवस्था पर सवाल खरा करता है। वही हाल बरारी प्रखंड के लक्ष्मीपुर, रूनीया, बीसनपुर एवं सिसिया का भी है पंचायत जहाँ फर्जी तरिके से केवल हाजरी बनाकर मजदूरों का उपस्तिथि दिखा रहा है। जिले क्षेत्र के कई मेटों ने बताया कि पोर्टल पर केवल उनका नाम दर्ज है। मोबाइल नंबर पंचायत में काम कर रहे बिचौलियों का लगा हुआ है। मेटों को ये तक नहीं पता कि उनकी हाजिरी बनी है या कितने मजदूरों की डिमांड लगी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि योजना स्थल पर मजदूरों की उपस्थिति शून्य है। बावजूद इसके रोजाना एनएमएमएस पोर्टल पर मजदूरों के नाम पर फर्जी हाजिरी बनाई जा रही है।
निगरानी समिति भी फेल
विभाग ने एनएमएमएस की निगरानी के लिए राज्य से लेकर प्रखंड स्तर तक निगरानी समिति गठित कर प्रतिदिन हाजिरी चेक करने का निर्देश दिया है। बावजूद इसके कटिहार जिले में लगातार फर्जीवाड़ा चल रहा है।सरकार का दावा है कि योजना स्थल पर काम करने वाले मजदूरों की जांच एआई से होती है। इसके बावजूद बगैर मजदूरों से काम कराए ऑनलाइन हाजिरी बनाकर मजदूरों के नाम पर पैसों की बंदरबांट की जा रही है।
नाम बदला पर व्यवस्था नहीं
स्थानीय लोगों और मेटों का आरोप है कि योजना का नाम बदल दिया गया, लेकिन सिस्टम वही पुराना कमीशनखोरी वाला है। केंद्र के केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के "शत-प्रतिशत पारदर्शिता" के दावे की कटिहार में पोल खुल रही है। मामले को लेकर जदयू नेता श्रवण कुमार साह का कहना है की इस तरह के कार्य से विभाग व सरकार की छवि धूमिल हो रही है एवं प्रतिदिन लाखों रुपए की गबन हो रहा है मामले मे जिलाधिकारी से जाँच कर कारवाई करने की मांग करते है साथ ही जिन मोबाईल नंबर से ऐप पर हाजरी बनाई गई है उसका सी डी आर निकलवाकर जाँच की जाए ताकि स्थानीय लोगों को यह पता चल सके की सही मे हाजरी मेट के द्वारा बनाई जा रही है या किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
