लाल किला धमाके के पीछे AQIS का नाम, यूएन रिपोर्ट में आतंकी नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा

UNSC की निगरानी टीम के अनुसार अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट छोटे-छोटे सेल और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के जरिए गतिविधियां बढ़ा रहा

Published By Shishir Patel
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NIA की चार्जशीट में भी हमले के आरोपियों के AQIS से जुड़े होने का उल्लेख

नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए घातक आतंकी हमले की जांच को लेकर संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में बड़ा और अहम खुलासा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति की निगरानी टीम की रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले पर हुआ हमला अलकायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट में साथ ही AQIS के बदलते तौर-तरीकों को लेकर चिंता जताई गई है।यूएन की रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब भारत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) लाल किला विस्फोट मामले की विस्तृत जांच कर रही है। एनआईए ने मई 2026 में इस मामले में करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में सामने आए कथित आतंकी मॉड्यूल और उसके संपर्कों को लेकर एजेंसी ने कई अहम साक्ष्य जुटाने का दावा किया था।

यूएन ने AQIS को हमले से जोड़ा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति के लिए तैयार की गई 38वीं निगरानी रिपोर्ट में AQIS की गतिविधियों का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक यह संगठन पहले की तरह किसी एक बड़े और केंद्रीकृत ढांचे के रूप में काम करने के बजाय छोटे-छोटे बिखरे हुए सेल, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क के माध्यम से अपनी गतिविधियां संचालित करने की दिशा में बढ़ रहा है।रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले पर हुआ हमला AQIS को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया। यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आकलन में एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया है।यूएन की निगरानी टीम ने AQIS को लेकर केवल भारत तक सीमित चिंता नहीं जताई है। रिपोर्ट में दक्षिण एशिया के दूसरे हिस्सों में भी संगठन के नेटवर्क को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।

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बड़े संगठन की जगह छोटे-छोटे सेल

रिपोर्ट के अनुसार AQIS एक बिखरे हुए संगठन से आगे बढ़कर क्षेत्रीय आतंकी नेटवर्क के रूप में विकसित हो रहा है। इसके लिए वह छोटे और अलग-अलग सेल तथा लॉजिस्टिक्स एवं वित्तीय नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है।आतंकी संगठनों के इस बदलते स्वरूप को सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती माना जाता है, क्योंकि छोटे समूहों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क सीमित होने के कारण पूरे नेटवर्क की पहचान और निगरानी मुश्किल हो सकती है। यूएन रिपोर्ट में भी AQIS के इस विकेंद्रीकृत स्वरूप को लेकर चिंता दर्ज की गई है।रिपोर्ट में अफगानिस्तान में AQIS की मौजूदगी और बांग्लादेश में अपने सेल स्थापित करने की कोशिशों का भी उल्लेख किया गया है। निगरानी टीम ने बांग्लादेश को लेकर विशेष चिंता जताते हुए कहा है कि AQIS वहां अपने नेटवर्क के विस्तार की कोशिश कर रहा है।

लाल किले के पास हुआ था घातक विस्फोट

नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के आसपास हुए कार विस्फोट ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया था। धमाका लाल किला मेट्रो स्टेशन के आसपास हुआ था और इसमें कई लोगों की जान गई तथा बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके को घेर लिया और मामले की जांच शुरू की। बाद में जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई। मामले में फोरेंसिक जांच, डीएनए प्रोफाइलिंग, वॉयस एनालिसिस और दूसरे वैज्ञानिक साक्ष्यों का इस्तेमाल किया गया। एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक जांच में दिल्ली, फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर से जुड़े साक्ष्यों की भी पड़ताल की गई।

NIA की चार्जशीट में भी सामने आया था आतंकी मॉड्यूल

यूएन रिपोर्ट से पहले ही एनआईए की जांच में इस हमले से जुड़े एक कथित आतंकी मॉड्यूल की जानकारी सामने आ चुकी थी। मई 2026 में दाखिल 7,500 पन्नों की चार्जशीट में एजेंसी ने 10 आरोपियों के नाम शामिल किए थे। चार्जशीट की जांच सामग्री में कई आरोपियों के कथित संपर्कों और आतंकी गतिविधियों का विवरण दिया गया है।

एनआईए के मुताबिक मामले की जांच में 588 गवाहों के बयान, 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से ज्यादा जब्त सामग्री को साक्ष्य के तौर पर शामिल किया गया। एजेंसी ने फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने का दावा किया है।चार्जशीट में जिन आरोपियों का उल्लेख किया गया है, उनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनका संबंध हरियाणा की एक यूनिवर्सिटी से बताया गया। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि कथित मॉड्यूल के सदस्य आतंकी गतिविधियों के लिए आपस में संपर्क में थे। इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

AQIS और AGuH के बीच कनेक्शन की जांच

इस मामले में अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) का नाम भी सामने आया है। एनआईए की जांच में कथित मॉड्यूल को AQIS से जुड़े संगठन के रूप में देखा गया है। यही कड़ी अब यूएन रिपोर्ट के निष्कर्ष के साथ महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने सीधे नवंबर 2025 के लाल किला हमले को AQIS से जोड़ा है।हालांकि, किसी भी आरोपी की भूमिका को अदालत में साबित किया जाना अभी बाकी है। जांच एजेंसी के आरोप, चार्जशीट में दर्ज तथ्य और संयुक्त राष्ट्र की निगरानी रिपोर्ट अलग-अलग स्तर के निष्कर्ष हैं; अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।

अफगानिस्तान और बांग्लादेश पर भी यूएन की नजर

यूएन रिपोर्ट का दायरा सिर्फ दिल्ली हमले तक सीमित नहीं है। इसमें दक्षिण एशिया में अलकायदा और उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियों का व्यापक आकलन किया गया है।रिपोर्ट के मुताबिक AQIS अफगानिस्तान में अपनी मौजूदगी बनाए हुए है और बांग्लादेश में नेटवर्क विस्तार की कोशिशों को लेकर भी चिंता है। निगरानी टीम ने बताया कि संगठन बड़े समूह की तुलना में छोटे और बिखरे सेल के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।इसका अर्थ यह है कि आतंकी संगठनों की गतिविधियां अब केवल पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे तक सीमित नहीं हैं। छोटे समूहों और अलग-अलग नेटवर्क के जरिए गतिविधियां चलाना सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती पैदा कर सकता है।

ऑनलाइन नेटवर्क और वित्तीय ढांचे पर भी नजर

यूएन रिपोर्ट में आतंकी संगठनों के लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क का भी उल्लेख है। AQIS के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि उसने छोटे-छोटे सेल के साथ ऐसे नेटवर्क विकसित किए हैं, जो संगठन की गतिविधियों को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं।रिपोर्ट का यह हिस्सा भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसी बड़े संगठन के बजाय छोटे नेटवर्क के जरिए गतिविधियां संचालित करने से इनके बीच प्रत्यक्ष संबंधों का पता लगाना और वित्तीय गतिविधियों को ट्रैक करना अधिक जटिल हो सकता है।

NIA जांच में तकनीकी और फोरेंसिक साक्ष्य अहम

लाल किला मामले की जांच में एनआईए ने तकनीकी और फोरेंसिक साक्ष्यों पर भी जोर दिया। एजेंसी की चार्जशीट में डीएनए प्रोफाइलिंग, वॉयस एनालिसिस और मौके से बरामद सामग्री सहित कई तरह के साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है।मामले की जांच केवल धमाके के दिन की घटनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि उससे पहले कथित साजिश, आरोपियों के संपर्क, उनके आपसी नेटवर्क और गतिविधियों की भी पड़ताल की गई।

यूएन रिपोर्ट के बाद जांच को मिल सकता है नया संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने अब लाल किला हमले की जांच को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के व्यापक संदर्भ से जोड़ दिया है। जहां एनआईए की जांच भारत में मामले से जुड़े आरोपियों और कथित मॉड्यूल पर केंद्रित है, वहीं यूएन रिपोर्ट AQIS की दक्षिण एशिया में व्यापक गतिविधियों और नेटवर्क विस्तार का आकलन करती है।दोनों स्तरों की जानकारियां एक साथ देखने पर यह स्पष्ट होता है कि लाल किला हमला केवल स्थानीय स्तर की घटना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसके कथित आतंकी नेटवर्क और उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

जांच अभी जारी

लाल किला हमले से जुड़े मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है। एनआईए की चार्जशीट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ अदालत में कार्यवाही आगे बढ़ेगी, जबकि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट दक्षिण एशिया में AQIS और उससे जुड़े नेटवर्क की गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी का हिस्सा है।यूएन रिपोर्ट का सबसे अहम निष्कर्ष यही है कि नवंबर 2025 के लाल किला हमले को AQIS से आधिकारिक तौर पर जोड़ा गया है। साथ ही रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि AQIS बड़े संगठित ढांचे के बजाय छोटे-छोटे सेल, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क के माध्यम से क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है।

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लेखक के बारे में

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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।

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